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प्रश्न
प्रेमचंद जी ने इस कहानी का नाम ‘नादान दोस्त’ रखा। आप इसे क्या शीर्षक देना चाहोगे?
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उत्तर
मैं इसे शीर्षक देना चाहूँगा-‘चिड़िया के अंडे’ या ‘रक्षा में हत्या’ अथवा ‘बच्चों की नादानी’।
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लेखिका अपने बचपन में कौन-कौन सी चीजें मज़ा ले-लेकर खाती थीं? उनमें से प्रमुख फलों के नाम लिखो।
बहुविकल्पीय प्रश्न:
पहले गीत-संगीत सुनने के क्या साधन थे?
लेखिका का जन्म किस सदी में हुआ था?
टोपी के संबंध में लेखिका क्या सोचती थी?
(क) केशव ने झुँझलाकर कहा
(ख) केशव रोनी सूरत बनाकर बोला
(ग) केशव घबराकर उठा
(घ) केशव ने टोकरी को एक टहनी से टिकाकर कहा.
(ङ) श्यामा ने गिड़गिड़ाकर कहा.
ऊपर लिखे वाक्यों में रेखांकित शब्दों को ध्यान से देखो ये शब्द रीतिवाचक क्रियाविशेषण का काम कर रहे हैं क्योंकि ये बताते हैं कि कहने, बोलने और उठने की क्रिया कैसे हुई। 'कर' वाले शब्दों के क्रियाविशेषण होने की एक पहचान यह भी है कि ये अकसर क्रिया से ठीक पहले आते हैं। अब तुम भी इन पाँच क्रियाविशेषणों का वाक्यों में प्रयोग करो।
बहुविकल्पी प्रश्न
‘नादान दोस्त’ पाठ के लेखक कौन हैं?
अक्षरों के ज्ञान से पहले मनुष्य अपनी बात को दूर-दराज़ के इलाकों तक पहुँचाने के लिए किन- किन माध्यमों का सहारा लेता था?
वैसे तो संख्याएँ संज्ञा होती हैं पर कभी-कभी ये विशेषण का काम भी करती हैं, जैसे नीचे लिखे वाक्य में।
• हमारी धरती लगभग पाँच अरब साल पुरानी है।
• कोई दस हज़ार साल पहले आदमी ने गाँवों को बसाना शुरू किया।
इन वाक्यों में रेखांकित अंश ‘साल’ संज्ञा के बारे में विशेष जानकारी दे रहे हैं, इसलिए संख्यावाचक विशेषण हैं। संख्यावाचक विशेषण का इस्तेमाल उन्हीं चीज़ों के लिए होता है जिन्हें गिना जा सके, जैसे-चार संतरे, पाँच बच्चे, तीन शहर आदि। पर यदि किसी चीज़ को गिना नहीं जा सकता तो उसके साथ संख्या वाले शब्दों के अलावा मापतोल आदि के शब्दों का इस्तेमाल भी किया जाता है
• तीन जग पानी
• एक किलो चीनी
यहाँ रेखांकित हिस्से परिमाणवाचक विशेषण हैं क्योंकि इनका संबंध मापतोल से है। अब आगे लिखे हुए को पढ़ो। खाली स्थानों में बाक्स में दिए गए मापतोल के उचित शब्द छाँटकर लिखो।
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प्याला कटोरी एकड़ मीटर लीटर किलो ट्रक चम्मच |
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तीन |
______ |
खीर |
दो |
______ |
ज़मीन |
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छह |
______ |
कपड़ा |
एक |
______ |
रेत |
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दो |
______ |
कॉफ़ी |
पाँच |
______ |
बाजरा |
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एक |
______ |
दूध |
तीन |
______ |
तेल |
अक्षरों के ज्ञान से पूर्व मनुष्य अपनी बात को दूर दराज के इलाकों तक पहुँचाने के लिए किन-किन माध्यमों का सहारा लेता था?
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बूढ़े बाँस की क्या पहचान है?
इस पाठ में कई हिस्से हैं जहाँ किसी काम को करने का तरीका समझाया गया है; जैसेछोटी मछलियों को पकड़ने के लिए इसे पानी की सतह पर रखा जाता है या फिर धीरे-धीरे चलते हुए खींचा जाता है। बाँस की खपच्चियों को इस तरह बाँधा जाता है कि वे शंकु का आकार ले लें। इस शंकु का ऊपरी सिरा अंडाकार होता है। निचले नुकीले सिरे पर खपच्चियाँ एक-दूसरे में गॅथी हुई होती हैं।
इस वर्णन को ध्यान से पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अनुमान लगाकर दो। यदि अंदाज लगाने में दिक्कत हो तो आपस में बातचीत करके सोचो-
(क) बाँस से बनाए गए शंकु के आकार का जाल छोटी मछलियों को पकड़ने के लिए ही क्यों इस्तेमाल किया जाता है?
(ख) शंकु का ऊपरी हिस्सा अंडाकार होता है तो नीचे का हिस्सा कैसा दिखाई देता है?
(ग) इस जाल से मछली पकड़ने वालों को धीरे-धीरे क्यों चलना पड़ता है?
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बुनावट
नुकीला
दबाव
घिसाई
