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प्रश्न
प्राचीन भारत में, आयतों, त्रिभुजों और समलंबों से संयोजित आकारों की वेदियाँ निम्नलिखित में प्रयोग होती थीं :
विकल्प
सार्वजनिक पूजा स्थल
घरेलू पूजा कार्य
A और B दोनों
A, B और C में से कोई नहीं
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उत्तर
सार्वजनिक पूजा स्थल
स्पष्टीकरण -
प्राचीन भारत में सार्वजनिक पूजा के लिए वेदियों का उपयोग किया जाता था, जिनकी आकृतियाँ आयतों, त्रिभुजों और समलंबों का संयोजन होती थीं।
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निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य हैं? अपने उत्तर के लिए कारण दीजिए।
यदि दो वृत्त बराबर हैं, तो उनकी त्रिज्याएँ बराबर होती हैं।
आकृति में, यदि AC = BD है, तो सिद्ध कीजिए कि AB = CD है।

पाइथागोरस एक विद्यार्थी था :
‘रेखाएँ समांतर होती हैं, यदि वे प्रतिच्छेद नहीं करती’ का कथन, निम्नलिखित के रूप में दिया गया है :
यूक्लिडीय ज्यामिति केवल वक्र पृष्ठों के लिए ही मान्य है।
ठोसों की परिसीमाएँ वक्र होती हैं।
निम्नलिखित प्रश्न को उपयुक्त यूक्लिड की अभिगृहीत का प्रयोग करते हुए, हल कीजिए :
निम्नलिखित आकृति में, हमें प्राप्त है :
AB = BC, BX = BY। दर्शाइए कि AX = CY है।

निम्नलिखित प्रश्न को उपयुक्त यूक्लिड की अभिगृहीत का प्रयोग करते हुए, हल कीजिए :
निम्नलिखित आकृति में, ∠1 = ∠3 और ∠2 = ∠4 है। दर्शाइए कि ∠A = ∠C है।

निम्नलिखित प्रश्न को उपयुक्त यूक्लिड की अभिगृहीत का प्रयोग करते हुए, हल कीजिए :
निम्नलिखित आकृति में, ∠ABC = ∠ACB और ∠3 = ∠4 है। दर्शाइए कि ∠1 = ∠2 है।

निम्नलिखित कथनों को अभिगृहीत माना गया है :
- यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करती है तो संगत कोण आवश्यक रूप से बराबर नहीं होते हैं।
- यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करती है तो एकांतर अंतःकोण बराबर होते हैं।
क्या अभिगृहीतों का यह निकाय संगत (अविरोधी) है? अपने उत्तर का औचित्य दीजिए।
