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प्रश्न
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्ति नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
“नहीं नहीं बूंदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की।”
विस्तार में उत्तर
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उत्तर
“नहीं नहीं बूंदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की।” इस पंक्ति का अर्थ है कि सावन के महीने में बादल नन्हीं-नन्हीं बूँदों की फुहार की तरह बरस रहे हैं और ठंडी-ठंडी सुहावनी हवा बह रही है, जो देखने और महसूस करने में बहुत सुंदर लगती है। यहाँ “नहीं नहीं” खुशी और अचंभे का बोल है जैसे मीरा आनंद से कह रही हों, “अरे वाह! देखो, मेघ कितने मधुर बरस रहे हैं!” नन्हीं बूँदों की वर्षा और शीतल पवन मीरा के मन को सुख और शांति देते हैं। यह सब देखकर उनका मन उमंग से भर जाता है, क्योंकि उन्हें सावन में अपने प्रिय श्रीकृष्ण के आने की भनक (उड़ती हुई खबर) मिलती है।
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