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पाठ में से चुनकर कुछ पंक्ति नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

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प्रश्न

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्ति नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

“बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।
जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ॥”

विस्तार में उत्तर
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उत्तर

इस कुंडली में कवि कहते हैं कि जो बीत चुका है, उसे भूल जाओ और आने वाले समय की सुधि (ध्यान) लो। अपना मन उसी काम में लगाओ जो सहज रूप से, अपने-आप बन रहा हो। ऐसा करने से कोई दुर्जन (बुरा व्यक्ति) हँस नहीं पाता और मन में कोई खोट (कमी या चिंता) नहीं रहती। गिरिधर कविराय कहते हैं कि मन में यही प्रतीति (विश्वास) रखो “बीती सो बीती”, यानी जो बीत गई सो बीत गई; इसे समझने से आगे का सुख होता है।

सीख: बीती हुई बात पर दुःख करने की बजाय उसे भूलकर वर्तमान और भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। जो काम अपने-आप बन रहा हो, उसी में मन लगाना चाहिए। यही जीवन में सुख का सरल मार्ग है।

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अध्याय 6: गिरिधर कविराय की कुंडलिया - पाठ से [पृष्ठ ७५]

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एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
अध्याय 6 गिरिधर कविराय की कुंडलिया
पाठ से | Q (ख) | पृष्ठ ७५
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