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प्रश्न
नीचे स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं, उनसे संबंधित अर्थ वाली स्तंभ 2 की पंक्तियों से उनका मिलान कीजिए:
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. जग में होत हँसाय चित्त में चैन न पावै। खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै॥ |
1. जो कार्य बिना विचार किए किया जाता है, वह लंबे समय तक मन में खटकता रहता है और उसकी पीड़ा से छुटकारा पाना मुश्किल होता है। |
| 2. कह गिरिघर कविराय दुख कछु टरत न टारे। टकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे॥ |
2. बिना विचार के किए गए कार्य के कारण मन अशांत रहता है। अच्छा खान-पान, सम्मान या जीवन की खुशियाँ भी उस व्यक्ति को सुख नहीं दे पातीं। |
| 3. ताही में चित देइ बात जोई बनि आवै। दुर्जन हँसे न कोइ चित्त में खता न पावै॥ |
3. अपने मन को इस बात पर विश्वास करना सिखाओ कि भविष्य की खुशी को समझते हुए अतीत के दुखों को भूलकर आगे बढ़ना चाहिए। |
| 4. कह गिरिधर कविराय यहै कर मन परतीती। आगे को सुख होइ समझि बीती सो बीती।। |
4. ऐसे कार्य कीजिए कि किसी बुरे व्यक्ति को हँसने का मौका न मिले और मन में किसी प्रकार का दोष या अपराधबोध न हो। |
जोड़ियाँ मिलाइएँ
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उत्तर
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. जग में होत हँसाय चित्त में चैन न पावै। खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै॥ |
2. बिना विचार के किए गए कार्य के कारण मन अशांत रहता है। अच्छा खान-पान, सम्मान या जीवन की खुशियाँ भी उस व्यक्ति को सुख नहीं दे पातीं। |
| 2. कह गिरिघर कविराय दुख कछु टरत न टारे। टकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे॥ |
1. जो कार्य बिना विचार किए किया जाता है, वह लंबे समय तक मन में खटकता रहता है और उसकी पीड़ा से छुटकारा पाना मुश्किल होता है। |
| 3. ताही में चित देइ बात जोई बनि आवै। दुर्जन हँसे न कोइ चित्त में खता न पावै॥ |
4. ऐसे कार्य कीजिए कि किसी बुरे व्यक्ति को हँसने का मौका न मिले और मन में किसी प्रकार का दोष या अपराधबोध न हो। |
| 4. कह गिरिधर कविराय यहै कर मन परतीती। आगे को सुख होइ समझि बीती सो बीती।। |
3. अपने मन को इस बात पर विश्वास करना सिखाओ कि भविष्य की खुशी को समझते हुए अतीत के दुखों को भूलकर आगे बढ़ना चाहिए। |
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