Advertisements
Advertisements
प्रश्न
"ऊपर की तसवीर से यह नहीं माना जाए कि बालगोबिन भगत साधु थे।" क्या 'साधु' की पहचान पहनावे के आधार पर की जानी चाहिए? आप किन आधारों पर यह सुनिश्चित करेंगे कि अमुक व्यक्ति 'साधु' है?
Advertisements
उत्तर
एक साधु की पहचान उसके पहनावे से नहीं बल्कि उसके आचार-व्यवहार तथा इसकी जीवन प्रणाली पर आधारित होती है। साधु को हमेशा दूसरों की सहायता करनी चाहिए, मोह-माया, लोभ से स्वयं को मुक्त रखना चाहिए। साधु का जीवन सात्विक होता है, उसका जीवन भोग-विलास की छाया से भी दूर होता है। उसके मन में केवल ईश्वर के प्रति सच्ची भक्ति होती है।
संबंधित प्रश्न
बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण क्यों थी?
पाठ के आधर पर बालगोबिन भगत के मधुर गायन की विशेषताएँ लिखिए।
कुछ मार्मिक प्रसंगों के आधार पर यह दिखाई देता है कि बालगोबिन भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे। पाठ के आधार पर उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए।
पाठ के आधार पर बताएँ कि बालगोबिन भगत की कबीर पर श्रद्धा किन-किन रूपों में प्रकट हुई है?
आपकी दृष्टि में भगत की कबीर पर अगाध श्रद्धा के क्या कारण रहे होंगे?
गाँव का सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश आषाढ़ चढ़ते ही उल्लास से क्यों भर जाता है?
मोह और प्रेम में अंतर होता है। भगत के जीवन की किस घटना के आधार पर इस कथन का सच सिद्ध करेंगे?
लेखक बालगोबिन भगत को गृहस्थ साधु क्यों मानता है? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
‘भगत अपनी सब चीज़ साहब की मानते थे’, उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
बालगोबिन भगत के संगीत को जादू क्यों कहा गया है?
भगत का आँगन नृत्य-संगीत से किस तरह ओत-प्रोत हो उठता था?
भगत की मृत्यु उन्हीं के अनुरूप हुई, कैसे? स्पष्ट कीजिए।
बालगोबिन भगत ने महिलाओं की सामाजिक स्थिति सुधारने के लिए क्या किया?
किस घटना के आधार पर कहा जा सकता है कि बालगोबिन भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे?
गद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -
बालगोबिन भगत की 'गर्मियों की संझा' के दृश्य का चित्रण अपने शब्दों में कीजिए।
गद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए:
बालगोबिन भगत गृहस्थी के भीतर भी संन्यासी किस तरह थे?
