हिंदी

नमूने के अनुसार लिखो: कच्चे-पक्के फल पहचाने, खाए और गिराए काट। - Hindi (हिंदी)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

नमूने के अनुसार लिखो:

नमूना →
छोड़ घोंसला बाहर आया. देखी डालें, देखे पात। 
  चुरुंगन घोंसला छोड़कर बाहर आया। उसने डालें और पत्ते देखे।

कच्चे-पक्के फल पहचाने,
खाए और गिराए काट।

एक पंक्ति में उत्तर
Advertisements

उत्तर

चुरुंगुन ने कच्चे और पक्के फलों में अंतर करना सीख लिया है और वह सब पहचानने लगा है। उसने उनमें से कुछ को खाया है और कुछ को काटकर गिरा भी दिया है।

shaalaa.com
पद्य (Poetry) (Class 7)
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 1: चिड़िया और चुरुंगुन - अभ्यास [पृष्ठ ३]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Durva Part 2 Class 7
अध्याय 1 चिड़िया और चुरुंगुन
अभ्यास | Q 1. ग | पृष्ठ ३

संबंधित प्रश्न

कठपुतली को गुस्सा क्यों आता है?


 इस कविता के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?


क्रांति लाने के लिए कवि किसका सहारा लेता है?


नमूने के अनुसार लिखो:
नमूना →
छोड़ घोंसला बाहर आया. देखी डालें, देखे पात। 
  चुरुंगन घोंसला छोड़कर बाहर आया। उसने डालें और पत्ते देखे।

उस तरु से इस तरु पर आता,
जाता हूँ धरती की ओर।


नीचे कुछ चीज़ों के नाम लिखें हैं। चुरुंगुन ने पहले किसे देखा? क्रम से लगाओ।

फूल, पात, फुनगी, दाल, फल, कलियाँ, धरती, साथी, तरु, दाना, गगन

इस पंक्ति से बारिश के बारे में क्या पता चलता है?

नमूना → सूरज की माँ ने उसको बुला लिया।
  ऐसा लगता है कि आसमान में सूरज नज़र नहीं आ रहा होगा।

काका किसी को ज़ोर-ज़ोर से डाँट रहे हैं।


बादल काका ज़ोर-ज़ोर से क्यों डाँट रहे हैं?


कुछ ऐसे देशभक्तों के नाम पता करके लिखो जो बचपन से ही आज़ादी की लड़ाई में कूद पड़े थे।


कविता में आया है कि सूरज की माँ ने उसे घर के भीतर बुला लिया। पता करो कि क्या सूरज की भी माँ होती होगी?


पक्षियों को पिंजरे में बंद करने से केवल उनकी आज़ादी का हनन ही नहीं होता, अपितु पर्यावरण भी प्रभावित होता है। इस विषय पर दस पंक्तियों में अपने विचार लिखिए।


कठपुतली को गुस्सा क्यों आया?


कठपुतली को अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा है, लेकिन वह क्यों नहीं खड़ी होती?


'बहुत दिन हुए / हमें अपने मन के छंद छुए।'- इस पंक्ति का अर्थ और क्या हो सकता है? अगले पृष्ठ पर दिए हुए वाक्यों की सहायता से सोचिए और अर्थ लिखिए-

(क) बहुत दिन हो गए, मन में कोई उमंग नहीं आई।

(ख) बहुत दिन हो गए, मन के भीतर कविता-सी कोई बात नहीं उठी, जिसमें छंद हो, लय हो।

(ग) बहुत दिन हो गए, गाने-गुनगुनाने का मन नहीं हुआ।

(घ) बहुत दिन हो गए, मन का दुख दूर नहीं हुआ और न मन में खुशी आई।


शाम के बदले यदि आपको एक कविता सुबह के बारे में लिखनी हो तो किन-किन चीजों की मदद लेकर अपनी कल्पना को व्यक्त करेंगे? नीचे दी गई कविता की पंक्तियों के आधार पर सोचिए
पेड़ों के झुनझुने
बजने लगे;
लुढ़कती आ रही है।
सूरज की लाल गेंद।
उठ मेरी बेटी, सुबह हो गई।


इस कविता में किस वातावरण का चित्रण है?


रहीम के दोहों से हमें क्या सीख मिलती है?


कविता में दो शब्दों के मध्य (−) का प्रयोग किया गया है, जैसे− 'जिससे उथल-पुथल मच जाए' एवं 'कण-कण में है व्याप्त वही स्वर'। इन पंक्तियों को पढ़िए और अनुमान लगाइए कि कवि ऐसा प्रयोग क्यों करते हैं?


कवि छत की मुंडेर पर किस भाव में खड़ा था?


घमंड करने को मनुष्य के विकास का बाधक समझा जाता है। क्या आपमें घमंड करने की प्रवृत्ति है?


कैसी बूंदें पड़ रही थीं।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×