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निराला जी की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए। - Hindi

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प्रश्न

निराला जी की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए।

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग ८० से १०० शब्दों में लिखिए।

निराला जी की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए।

विस्तार में उत्तर
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उत्तर १

महादेवी वर्मा जी ने 'निराला भाई' इस संस्मरण में निराला जी के चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन किया है। निराला जी मानवता के पुजारी थे। उनमें मानवीय गुण कूट-कूट कर भरे हुए थे। उन्हें स्वयं से अधिक दूसरों की अधिक चिंता होती थी। खुद निर्धनता में जीवन बिताते रहे, पर दूसरों के आर्थिक दुखों का भार उठाने के लिए सदा तत्पर रहते थे। आतिथ्य करने में उनका जवाब नहीं था। अतिथियों को सदा हाथ पर लिये रहते थे। उनके लिए खुद भोजन बनाने और बर्तन माँजने में उन्हें हर्ष होता था। घर में सामान न होने पर अतिथियों के लिए मित्रों से कुछ चीजें माँग लाने में शर्म नहीं करते थे। उदार इतने थे कि अपने उपयोग की वस्तुएँ भी दूसरों को दे देते थे और खुद कष्ट उठाते थे। 

साथी साहित्यकारों के लिए उनके मन में बहुत लगाव था। एक बार कवि सुमित्रानंदन पंत के स्वर्गवास की झूठी खबर सुनकर वे व्यथित हो गए थे और उन्होंने पूरी रात जाग कर बिता दी थी। निराला जी पुरस्कार में मिले धन का भी अपने लिए उपयोग नहीं करते थे। अपनी अपरिग्रही वृत्ति के कारण उन्हें मधुकरी खाने तक की नौबत भी आई थी। इस बात को वे बड़े निश्छल भाव से बताते थे। उनका विशाल डील-डौल देखने वालों के हृदय में आतंक पैदा कर देता था, पर उनके मुख की सरल आत्मीयता इसे दूर कर देती थी। निराला जी से अन्याय सहन नहीं होता था। इसके विरोध में उनका हाथ और उनकी लेखनी दोनों चल जाते थे। निराला जी आचरण से क्रांतिकारी थे। वे किसी चीज का विरोध करते हुए कठिन चोट करते थे। पर उसमें द्वेष की भावना नहीं होती थी। निराला जी के प्रशंसक तथा आलोचक दोनों थे। कुछ लोग जहाँ उनकी नम्र उदारता की प्रशंसा करते थे, वहीं कुछ लोग उनके उद्धत व्यवहार की निंदा करते नहीं थकते थे।
निराला जी अपने युग की विशिष्ट प्रतिभा रहे हैं। उनके सामने अनेक प्रतिकूल परिस्थितियाँ आईं पर वे कभी हार नहीं माने।

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उत्तर २

निराला जी सच्चे मानवतावादी थे और उनमें मानवीय संवेदनाएँ भरपूर थीं। वे अपनी अपेक्षा दूसरों की चिंता अधिक करते थे। स्वयं अभावों में रहते हुए भी दूसरों की आर्थिक सहायता के लिए तत्पर रहते थे। अतिथियों का आदर-सत्कार करना उनका स्वभाव था और वे अपनी आवश्यक वस्तुएँ भी दूसरों को दे देते थे। साथी साहित्यकारों के प्रति उनके मन में गहरा स्नेह था। एक बार सुमित्रानंदन पंत के निधन की अफवाह सुनकर वे अत्यंत दुखी हो गए और पूरी रात सो नहीं सके।

उन्हें पुरस्कार में मिली धनराशि का भी उन्होंने निजी उपयोग नहीं किया। अपनी फक्कड़ प्रवृत्ति के कारण उन्हें कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनका व्यक्तित्व प्रभावशाली था, पर स्वभाव अत्यंत सरल और आत्मीय था। वे अन्याय सहन नहीं करते थे और उसके विरुद्ध खुलकर लिखते-बोलते थे। उनका स्वभाव क्रांतिकारी था। कुछ लोग उनकी स्पष्टवादिता की प्रशंसा करते थे, तो कुछ उनकी कठोरता की आलोचना भी करते थे। अनेक विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वे अपने युग के विशिष्ट साहित्यकार बने रहे।

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Notes

Students should refer to the answer according to their question and preferred marks.

निराला भाई
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 2: निराला भाई - पाठ पर आधारित लघूत्तरी प्रश्न [पृष्ठ १०]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Yuvakbharati [English] Standard 12 Maharashtra State Board
अध्याय 2 निराला भाई
पाठ पर आधारित लघूत्तरी प्रश्न | Q 1 | पृष्ठ १०

संबंधित प्रश्न

लिखिए:

लेखिका के पास रखे तीन सौ रुपये इस प्रकार समाप्त हो गए :

(१) __________________

(२) __________________

(३) __________________

(४) __________________


लिखिए:

अतिथि की सुविधा हेतु निराला जी ये चीजें ले आए :

(१) __________________

(२) __________________

(३) __________________

(४) __________________


‘भाई-बहन का रिश्ता अनूठा होता है’, इस विषय पर अपना मत लिखिए।


‘सभी का आदरपात्र बनने के लिए व्यक्ति का सहृदयी और संस्कारशील होना आवश्यक है’, इस कथन पर अपने विचार लिखिए।


निराला जी का आतिथ्य भाव स्पष्ट कीजिए।


‘निराला’ जी का मूल नाम - ________


निम्नलिखित प्रश्‍न का मात्र एक वाक्य में उत्तर लिखिए:

हिंदी के कुछ आलोचकों द्वारा महादेवी वर्मा को दी गई उपाधि − 


निम्नलिखित प्रश्‍न का मात्र एक वाक्य में उत्तर लिखिए:

हिंदी के कुछ आलोचकों द्वारा महादेवी वर्मा को कौन-सी उपाधि दी गई?


निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

              संयोग से तभी उन्हें कहीं से तीन सौ रुपये मिल गए। वही पूँजी मेरे पास जमा करके उन्होंने मुझे अपने खर्च का बजट बना देने का आदेश दिया। जिन्हें मेरा व्यक्तिगत हिसाब रखना पड़ता है, वे जानते हैं कि यह कार्य मेरे लिए कितना दुष्कर है। न वे मेरी चादर लंबी कर पाते हैं; न मुझे पैर सिकोड़ने पर बाध्य कर सकते हैं; और इस प्रकार एक विचित्र रस्साकशी में तीस दिन बीतते रहते हैं।

              पर यदि अनुत्तीर्ण परीक्षार्थियों की प्रतियोगिता हो तो सौ में दस अंक पाने वाला भी अपने-आपको शून्य पाने वाले से श्रेष्ठ मानेगा।

              अस्तु, नमक से लेकर नापित तक और चप्पल से लेकर मकान के किराये तक का जो अनुमानपत्र मैंने बनाया; वह जब निराला जी को पसंद आ गया, तब पहली बार मुझे अपने अर्थशास्त्र के ज्ञान पर गर्व हुआ। पर दूसरे ही दिन से मेरे गर्व की व्यर्थता सिद्ध होने लगी। वे सवेरे ही पहुँचे। पचास रुपये चाहिए... किसी विद्यार्थी का परीक्षा शुल्क जमा करना है, अन्यथा वह परीक्षा में नहीं बैठ सकेगा। संध्या होते-होते किसी साहित्यिक मित्र को साठ देने की आवश्यकता पड़ गई। दूसरे दिन लखनऊ के किसी ताँगेवाले की माँ को चालीस का मनीऑर्डर करना पड़ा। दोपहर को किसी दिवंगत मित्र की भतीजी के विवाह के लिए सौ देना अनिवार्य हो गया। सारांश यह कि तीसरे दिन उनका जमा किया हुआ रुपया समाप्त हो गया और तब उनके व्यवस्थापक के नाते यह दान खाता मेरे हिस्से आ पड़ा।

(१) संजाल पूर्ण कीजिए: (२)

(२) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए हुए विलोम शब्द लिखिए: (२)

  1. वियोग × ______
  2. उत्तीर्ण × ______
  3. नापसंद × ______
  4. अज्ञान × ______

(३) ‘जीवन में मित्रों का महत्त्व’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)


निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

बड़े प्रयत्न से बनवाई रजाई, कोट जैसी नित्य व्यवहार की वस्तुएँ भी जब दूसरे ही दिन किसी अन्य का कष्ट दूर करने के लिए अंतर्धान हो गईं तब अर्थ के संबंध में क्या कहा जावे, जो साधन मात्र है। वह संध्या भी मेरी स्मृति में विशेष महत्त्व रखती है जब श्रद्धेय मैथिलीशरण जी निराला जी का आतिथ्य ग्रहण करने गए।

बगल में गुप्त जी के बिछौने का बंडल दबाए, दियासलाई के क्षण प्रकाश, क्षीण अंधकार में तंग सीढ़ियों का मार्ग दिखाते हुए निराला जी हमें उस कक्ष में ले गए जो उनकी कठोर साहित्य साधना का मूक साक्षी रहा है।

आले पर कपड़े की आधी जली बत्ती से भरा पर तेल से खाली मिट्टी का दीया मानो अपने नाम की सार्थकता के लिए जल उठने का प्रयास कर रहा था।

वह आलोकरहित, सुख-सुविधा शून्य घर, गृहस्वामी के विशाल आकार और उससे भी विशालतर आत्मीयता से भरा हुआ था। अपने संबंध में बेसुध निराला जी अपने अतिथि की सुविधा के लिए सतर्क प्रहरी हैं। अतिथि की सुविधा का विचार कर वे नया घड़ा खरीदकर गंगाजल ले आए और धोती-चादर जो कुछ घर में मिल सका; सब तख्त पर बिछाकर उन्हें प्रतिष्ठित किया।

तारों की छाया में उन दोनों मर्यादावादी और विद्रोही महाकवियों ने क्या कहा-सुना, यह मुझे ज्ञात नहीं पर सवेरे गुप्त जी को ट्रेन में बैठाकर वे मुझे उनके सुख शयन का समाचार देना न भूले।

ऐसे अवसरों की कमी नहीं जब वे अकस्मात पहुँचकर कहने लगे-मेरे इक्के पर कुछ लकड़ियाँ, थोड़ा घी आदि रखवा दो। अतिथि आए हैं, घर में सामान नहीं है।

  1. संजाल पूर्ण कीजिए:      [2]

  2. निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए हुए समानार्थी शब्द ढूँढ़कर लिखिए:    [2]
    1. मेहमान - ______
    2. प्रयास - ______
    3. शाम - ______
    4. दीपक - ______
  3. 'आतिथ्य भाव' हमारे संस्कार हैं, इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए।    [2]

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