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प्रश्न
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
पहले इक आसमान पैदा कर, अपनी आँखों से जिंदगी को पढ़, सब्र के पेड़ पर लगेंगे फल, ऐ खुदा! जिसमें जी सके इन्सॉँ, तूने बख्शी है जिंदगी, तू ही, |
(1) उचित जोड़ियाँ मिलाइए: 2
| ‘अ’ | ‘आ’ |
| (i) पर | आसमान |
| (ii) अनुभव | जान |
| (iii) सब्र | उड़ान |
| (iv) जिंदगी | फल |
| ज्ञान |
(2) उपर्युक्त पद्यांश की अंतिम चार पंक्तियों का 25 से 30 शब्दों में सरल अर्थ लिखिए। 2
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उत्तर
(1)
| ‘अ’ | ‘आ’ |
| (i) पर | उड़ान |
| (ii) अनुभव | ज्ञान |
| (iii) सब्र | फल |
| (iv) जिंदगी | जान |
(2)
आज की दुनिया तनाव, परेशानियों और हिंसा से भरी हुई है। हर व्यक्ति भय में जी रहा है कि कब क्या अनहोनी हो जाए। कहीं हड़तालें होती हैं तो कहीं दंगे-फसाद, और आतंकवाद भी लोगों को लगातार डराता रहता है। कवि ईश्वर से प्रार्थना करता है कि वह ऐसा संसार बनाए जहाँ सभी मनुष्य डर और आतंक से मुक्त होकर शांति से जीवन जी सकें। कवि आगे कहता है कि हे भगवान, आपने ही हमें यह सुंदर जीवन दिया है। इसलिए आप ही हमारे मन में आशा और विश्वास की भावना जागृत करें।
