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प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर लगभग 80 शब्दों में उत्तर दीजिए:
रेडियो नाटक में संवाद की क्या विशेषताएँ हैं?
विस्तार में उत्तर
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उत्तर
- रेडियो नाटक में पात्रों संबंधी तमाम जानकारी हमें संवादों के माध्यम से ही मिलती हैं। उनके नाम, आपसी संबंध, चारित्रिक विशेषताएँ, ये सभी हमें संवादों द्वारा ही उजागर करना होता है।
- भाषा पर भी विशेष ध्यान रखना होगा। वो पढ़ा-लिखा है कि अनपढ़, शहर का है कि गाँव का, कया वो किसी विशेष प्रांत का है, उसकी उम्र क्या है, वो क्या रोज़गार - धंधा करता है। इस तरह की तमाम जानकारियाँ उस चरित्र की भाषा को निर्धारित करेंगी।
- फिर पात्रों का आपसी संबंध भी संवाद की बनावट पर असर डालता है। एक ही व्यक्ति अपनी पत्नी से अलग ढंग से बात करेगा, अपने नौकर से अलग ढंग से, आपने बॉस के प्रति सम्मानपूर्वक रवैया अपनाएगा, तो अपने मित्र के प्रति उसका बराबरी और गरम-जोशी का व्यवहार होगा।
- रेडियो में कौन किससे बात कर रहा है, हम देख नहीं पाते इसलिए संवाद जिस चरित्र को संबोधित है, उसका नाम लेना ज़रूरी होता है, खासतौर पर जब दृश्यों में दो से अधिक पात्र हों। इसके अलावा रेडियो नाटक में कई बार कोई पात्र विशेष जब कोई हरकत, कोई एक्शन करता है तो उसे भी संवाद का हिस्सा बनाना पड़ता है।
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