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प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30) शब्दों में लिखिए −
महादेव भाई के लिखे नोट के विषय में गांधीजी क्या कहते थे?
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उत्तर
गांधीजी की यह बात -
“महादेव के लिखे ‘नोट’ के साथ थोड़ा मिलान कर लेना था न। और लोग दाँतों अँगुली दबाकर रह जाते।”
यह दर्शाती है कि महादेव देसाई की लेखन शैली, तथ्यात्मक जानकारी और अभिव्यक्ति की शक्ति इतनी प्रभावशाली थी कि उनके द्वारा लिखा गया कोई भी ‘नोट’ या टिप्पणी पूर्णतः सटीक और विश्वसनीय मानी जाती थी।
गांधीजी यह कहना चाहते थे कि महादेव के शब्दों से बेहतर या अधिक सटीक कुछ हो ही नहीं सकता, और जब लोग उनके लिखे हुए को पढ़ते थे, तो आश्चर्यचकित होकर दाँतों तले अंगुली दबा लेते थे, यानी उनकी विद्वता और लेखनी से चकित रह जाते थे।
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निम्नांकित शब्द-समूहों को पढ़ो और समझो
- कङ्घा, पतङ्ग, चञ्चल, ठण्डा, सम्बन्ध।
- कंघा, पतंग, चंचल, ठंडा, संबंध।
- अक्षुण्ण, सम्मिलित, दुअन्नी, चवन्नी, अन्न।
- संशय, संसद्, संरचना, संवाद, संहार।
- अँधेरा, बाँट, मुँह, ईंट, महिलाएँ, में, मैं।
ध्यान दो कि ङ, ज्, ण, न् और म् ये पाँचों पंचमाक्षर कहलाते हैं। इनके लिखने की विधियाँ तुमने ऊपर देखीं-इसी रूप में या अनुस्वार के रूप में। इन्हें दोनों में से किसी भी तरीके से लिखा जा सकता है और दोनों ही शुद्ध हैं। हाँ, एक पंचमाक्षर जब दो बार आए तो अनुस्वार का प्रयोग नहीं होगा; जैसे-अम्मा, अन्न आदि। इसी प्रकार इनके बाद यदि अंतस्थ य, र, ल, व और ऊष्म श, ष, स, ह आदि हों तो अनुस्वार का प्रयोग होगा, परंतु उसका उच्चारण पंचम वर्गों में से किसी भी एक वर्ष की भाँति हो सकता है; जैसे-संशय, संरचना में ‘न्’, संवाद में ‘म्’ और संहार में ‘ङ’।
( ं) यह चिह्न है अनुस्वार का और ( ँ) यह चिह्न है अनुनासिक का। इन्हें क्रमशः बिंदु और चंद्र-बिंदु भी कहते हैं। दोनों के प्रयोग और उच्चारण में अंतर है। अनुस्वार को प्रयोग व्यंजन के साथ होता है अनुनासिक का स्वर के साथ।
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प्रस्तुत पाठ में आए अनुस्वार और अनुनासिक शब्दों को निम्न तालिका में लिखिए −
|
|
अनुस्वार |
अनुनासिक | |
|
(क) |
अंदर |
(क) |
ढूँढ़ते |
|
(ख) |
____________ |
(ख) |
____________ |
|
(ग) |
____________ |
(ग) |
____________ |
|
(घ) |
____________ |
(घ) |
____________ |
|
(ङ) |
____________ |
(ङ) |
____________ |
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