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निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए। पति बर्नै चारमुख पूत बर्नै पंच मुख नाती बर्नै षटमुख तदपि नई-नई। चहुँ ओरनि नाचति मुक्तिनटी गुन धूरजटी वन पंचवटी। - Hindi (Elective)

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प्रश्न

निम्नलिखित पंक्ति का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

पति बर्नै चारमुख पूत बर्नै पंच मुख नाती बर्नै षटमुख तदपि नई-नई।

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उत्तर

प्रस्तुत पंक्तियों में कवि सरस्वती के बखान को कहने में स्वयं को असमर्थ पाता है। इसमें उनकी महिमा को अतुलनीय बताया है। उसके अनुसार सरस्वती का बखान अकथनीय है। ब्रजभाषा का बहुत सुंदर प्रयोग है। 'नई-नई' में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार की छटा दिखाई देती है। कवि ने इसमें अतिशयोक्ति अलंकार का प्रयोग किया है। तत्सम शब्दों 'पाँचमुख', 'षटमुख' तथा 'तदपि' आदि का प्रयोग किया गया है।

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रामचंद्रचंद्रिका
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