Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्नलिखित का उत्तर लगभग १०० से १२० शब्दों में लिखिए:
‘नर हो, न निराश करो मन को ', इस उक्ति का पल्लवन कीजिए।
Advertisements
उत्तर
यह सार्वभौमिक सत्य है कि मनुष्य संसार का सबसे अधिक गुणवान और बुद्धिसंपन्न प्राणी है। वह अपनी अद्भुत बुद्धि एवं अपने कौशल के बल पर इस संसार में महान से महान कार्य कर अपने साहस और सामर्थ्य का परिचय दे चुका है। शांति, सद्भाव और समानता की स्थापना के लिए वह प्रयासरत रहा। इन सबके पीछे उसका आंतरिक, मानसिक बल ही था। चूँकि मनुष्य विधाता की सर्वोत्कृष्ट एवं सर्वाधिक गुणसंपन्न कृति है। अत: उसे अपने जीवन में कभी निराश नहीं होना चाहिए। यह तो मनुष्य का जीवन है कि जहाँ उसके जीवन में सुख है, वहाँ दु:ख भी है, लाभ है तो हानि भी है, सफलताएँ हैं तो असफलताएँ भी हैं। यदि उसका मन ही पराजित हो जाएगा, थक जाएगा तो इस धरा को स्वर्ग-सा कैसे बना पाएगा? उसके मन की इसी संकल्प-विकल्पमयी, साहसिक शक्ति को उसका मनोबल कहा जाता है। जो उसे हर समय श्रेष्ठ बनने हेतु कर्म के लिए प्रेरित करता है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
पल्लवन की प्रक्रिया पर प्रकाश डालिए।
पल्लवन की विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए।
‘‘ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होइ’’, इस पंक्ति का भाव पल्लवन कीजिए ।
‘लालच का फल बुरा होता है’, इस उक्ति का विचार पल्लवन कीजिए ।
“जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोइ तू फूल।” इस पंक्ति का भाव पल्लवन कीजिए।
पल्लवन में सूक्ति, उक्ति, पंक्ति या काव्यांश का ______ किया जाता है।
'मन के हारे हार है, मन के जीते जीत' इस पंक्ति का भाव पल्लवन कीजिए।
हिंदी में ‘पल्लवन’ शब्द अंग्रेजी ______ शब्द के प्रतिशब्द के रूप में आता है।
निम्नलिखित का उत्तर लगभग १०० से १२० शब्दों में लिखिए:
“सेवा तीर्थयात्रा से बढ़कर है," इस उक्ति का पल्लवन कीजिए।
