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प्रश्न
'मन के हारे हार है, मन के जीते जीत' इस पंक्ति का भाव पल्लवन कीजिए।
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उत्तर
मानव को सर्वश्रेष्ठ प्राणी कहा जाता है। मनुष्य को श्रेष्ठता प्रदान करने में बुद्धि की सहायता मिली है। परन्तु सार्थकता प्राप्त हुई तो केवल मन के कारण। मन की चंचलता को नापा या गिना नहीं जाता। न ही मन को बाँधकर हम स्थिर रख सकते हैं। 'मन' के बारे में क्या कह सकते हैं ? मन अनेक विचारों, तर्कों से भरा भंडार है। मन को स्थिर रखकर सही दिशा में लाना था। सही मार्ग दिखाना ही मन की जीत है। मन की शक्ति पर ही मनुष्य की जीत या हार निर्भर होती है। मन में आने वाले नकारार्थी विचार हार का निर्देश करते हैं। संकल्पों की दृढ़ता कुछ करने की इच्छा शक्ति मन को प्रफुल्लित करती है और हमारा मन सफलता की ओर निर्देशित होता है। सकारात्मकता से मन स्थिर रहता है। नकारात्मक विचारों को, मन अस्थिर करने वाले विचारों को दूर रखने में ही भलाई है। मन की सकारात्मक शक्ति तन पर प्रभाव डालकर कार्य करने की ऊर्जा देती है।दुर्बल मन शारीरिक ऊर्जा को क्षीण कर देता है। जीत सफलता मन पर निर्भर होती है। मन के हारने से नकारात्मकता से हम हार जाते हैं तो मन को जीतने से सकारात्मकता से हम जीत जाते हैं।
