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प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
इस गीत में 'सर पर कफ़न बाँधना' किस ओर संकेत करता है?
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उत्तर
इस गीत में ‘सर पर कफ़न बाँधना’ देश के लिए अपना सर्वस्व अर्थात् संपूर्ण समर्पण की ओर संकेत करता है। सिर पर कफन बाँधकर चलने वाला व्यक्ति अपने प्राणों से मोह नहीं करता, बल्कि अपने प्राणों का बलिदान देने के लिए सदैव तैयार रहता है इसलिए हर सैनिक सदा मौत को गले लगाने के लिए तत्पर रहता है।
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इस गीत में धरती को दुल्हन क्यों कहा गया है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने इस कविता में किस काफ़िले को आगे बढ़ाते रहने की बात कही है?
निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-
खींच दो अपने खू से जमीं पर लकीर
इस तरफ़ आने पाए न रावन कोई
इस गीत में कुछ विशिष्ट प्रयोग हुए हैं। गीत के संदर्भ में उनका आशय स्पष्ट करते हुए अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
कट गए सर, नब्ज़ जमती गई, जान देने की रुत, हाथ उठने लगे
कैफ़ी आज़मी की अन्य रचनाओं को पुस्तकालय से प्राप्त कर पढ़िए और कक्षा में सुनाइए। इसके साथ ही उर्दू भाषा के अन्य कवियों की रचनाओं को भी पढ़िए।
एन.सी.ई.आ. ट. द्वारा कैफ़ी आज़मी पर बनाई गई फ़िल्म देखने का प्रयास कीजिए।
अपना बलिदान देकर भी सैनिकों को दुख की अनुभूति क्यों नहीं हो रही है?
‘आज धरती बनी है दुलहन साथियो’ ऐसा सैनिकों को क्यों लग रहा है?
सैनिक अपनी जवानी को कब सार्थक मानता है?
‘कर चले हम फ़िदा’ कविता की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
कविता में राम, लक्ष्मण, सीता और रावण का प्रयोग किन संदर्भो में हुआ है, स्पष्ट कीजिए।
'तुम्हीं राम, तुम्हीं लक्ष्मण' कवि ने ऐसा कहा है क्योंकि ______।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए:
आपके द्वारा 'स्पर्श' पाठ्यक्रम में पढ़ी गई किस कविता की अंतिम पंक्तियाँ आपको सर्वाधिक प्रभावित करती हैं और क्यों? अपने विचार व्यक्त कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 25 से 30 शब्दों में लिखिए:
‘फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है’- ‘कर चले हम फिदा’ कविता से उद्धृत प्रस्तुत पंक्ति में ‘इस जश्न’ से कवि का क्या आशय है और उसे बाद में मनाने के पीछे क्या कारण हैं?
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए -
| साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई, फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया, कट गए सर हमारे तो कुछ गम नहीं, सर हिमालय का हमने न झुकने दिया, मरते-मरते रहा बाँकपन साथियो, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो। ज़िंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर जान देने की रुत रोज़ आती नहीं हुस्न और इश्क दोनों को रुसवा करे वो जवानी जो खेँ में नहाती नहीं, आज धरती बनी है दुलहन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों ! |
- 'सर हिमालय का हमने न झुकने दिया' का अर्थ है -
(A) हिमालय को सजाना।
(B) हिमालय की हिफाज़त करना।
(C) भारत के गौरव को बनाए रखना।
(D) भारत का गुणगान करना। - कवि द्वारा 'साथियो' संबोधन का प्रयोग ______ के लिए किया गया है।
(A) कवियों
(B) शहीदों
(C) सैनिकों
(D) देशवासियों - 'मरते-मरते रहा बाँकपन साथियो' कवि ने ऐसा कहा है क्योंकि -
(A) सैनिक धरती को दुल्हन की तरह सजा हुआ देखकर प्रसन्न हो गए।
(B) सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा हेतु जोश और साहस से युद्ध किया।
(C) देशवासियों को बार-बार पुकारकर सैनिकों ने उनमें देशभक्ति का भाव जगाया।
(D) सैनिकों ने कभी भी टेढ़ेपन से बातचीत नहीं की, देश रक्षा ही एकमात्र उद्देश्य रहा। - 'जान देने की रुत रोज़ आती नहीं' का भाव है -
(A) सैनिकों के हृदय में जीवित रहने की इच्छा नहीं।
(B) जीवित रहने का समय आनंददायक होना चाहिए।
(C) आत्म बलिदान द्वारा भी देश की रक्षा के लिए तत्पर।
(D) जीवन और मरण सब कुछ ईश्वर की इच्छा पर निर्भर। - इस काव्यांश का संदेश यह है कि हमें -
(A) हुस्न और इश्क को रुसवा करना चाहिए।
(B) देश को दूसरों के हवाले कर देना चाहिए।
(C) धरती को दुल्हन की तरह सजाना चाहिए।
(D) देश पर कुर्बान होने के लिए तैयार रहना चाहिए।
पद्य खंड पर आधारित प्रश्न के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :
कैफ़ी आजमी का यह गीत - 'कर चले हम फिदा...' किनके बारे में लिखा गया है? इस गीत में उनकी किन विशेषताओं का वर्णन किया गया है?
