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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) ९ वीं कक्षा

निम्‍नलिखित गद्यांश पर ऐसे पाँच प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्‍तर एक-एक वाक्‍य में हो। मेरा विश्वास है कि नेता गढ़े नहीं जाते। वे जन्म लेते हैं।

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प्रश्न

निम्‍नलिखित गद्यांश पर ऐसे पाँच प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्‍तर एक-एक वाक्‍य में हो।

मेरा विश्वास है कि नेता गढ़े नहीं जाते। वे जन्म लेते हैं। नेता का असली लक्षण है कि वे भिन्न मतावलंबियों को आम संवेदना के जरिए इकट्ठा कर सकते हैं। यह काम स्‍वाभाविक क्षमतावश अपने आप संपन्न हो जाता है, कोशिश करके यह संभव नहीं है। पश्चिमी देश से प्रत्‍यावर्तन से कुछ पहले एक अंग्रेज मित्र ने मुझसे सवाल किया था, ‘‘स्‍वामी जी, चार वर्ष विलास की लीलाभूमि, गौरव के मुकुटधारी, महाशक्‍तिशाली पाश्चात्‍य भूमि पर भ्रमण के बाद मातृभूमि आपको कैसी लगेगी?’’
मैंने उत्‍तर दिया, ‘‘पाश्चात्‍य भूमि में आने से पहले मैं भारत से प्यार करता था। अब भारत भूमि का धूल कण तक मेरे लिए पवित्र है। भारत की वायु मेरे लिए पवित्रतायुक्‍त है। मेरे लिए वह देश अब तीर्थ-स्‍वरूप है।’’ इसके अलावा मेरे मन को अन्य कोई उत्‍तर नहीं सूझा।
संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

  1. लेखक के पश्चिमी देश से प्रत्‍यावर्तन से कुछ पहले किसने सवाल किया था?
  2. पाश्चात्‍य भूमि में आने से पहले लेखक किससे प्यार करते थे?
  3. स्‍वामी जी चार साल किस भूमि पर भ्रमण कर रहे थे?
  4. लेखक के लिए देश अब किसके स्‍वरूप है?
  5. लेखक के लिए क्या पवित्रतायुक्‍त है?
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गद्‍य आकलन
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अध्याय 2.14: रचना एवं व्याकरण विभाग - स्वाध्याय [पृष्ठ ११९]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Kumarbharati Standard 9 Maharashtra State Board
अध्याय 2.14 रचना एवं व्याकरण विभाग
स्वाध्याय | Q १. | पृष्ठ ११९

संबंधित प्रश्न

निम्‍नलिखित परिच्छेद पढ़कर ऐसे पाँच प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्‍तर एक-एक वाक्‍य में हों:

भारतीय वायु सेना की एक प्रशिक्षणार्थी डॉ. कु. गीता घोष ने उस दिन यह छलाँग लगाकर भारतीय महिलाओं की प्रगति के इतिहास में एक पन्ना और जोड़ दिया था डॉ. घोष पहली भारतीय महिला हैं, जिन्होंने वायुयान से छतरी द्वारा उतरने का साहसिक अभियान किया था।

छतरी से उतरने का प्रशिक्षण पूरा करने के लिए हर छाताधारी को सात बार छतरी से उतरना पड़ता है। इनमें से पहली कूद तो रोमांचित होती ही है, वह कूद और भी रोमांचक होती है, जब उसे रात के अँधेरे में कहीं जंगल में अकेले उतरना होता है। डॉ. गीता न पहली कूद में घबराईं, न अन्य कूदों में और इसी प्रकार सातों कूदें उन्होंने सफलतापूर्वक पूरी कर लीं। प्रशिक्षण के दौरान उनका यह कथन कि “मैं चाहती हूँ, जल्‍दी ये कूदें खत्‍म हों और मैं पूर्ण सफल छाताधारी बन जाऊँ”, उनकी उमंग तथा उत्‍साह को प्रकट करता है। डॉ. गीता के अनुसार, उनकी डॉक्‍टरी शिक्षा भी इसी अभियान में काम आई। फिर लगन और नए क्षेत्र में प्रवेश का उत्‍साह हो तो कौन-सा काम कठिन रह जाता है। प्रशिक्षण से पूर्व तो उन्हें और भी कठिन परीक्षाओं के दौर से गुजरना पड़ा था।


निम्‍नलिखित परिच्छेद पढ़कर ऐसे पाँच प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्‍तर एक-एक वाक्‍य में हों :

परिच्छेद - २

     भगिनी निवेदिता एक विदेशी महिला थीं, किंतु उन्होंने इस देश के नवोत्‍थान और भारतीय राष्‍ट्रीयता के विकास के लिए बहुत कुछ किया। जीवन के संबंध में उनका दृष्‍टिकोण बड़ा ही उदार था, समूचे संसार को वे एक ऐसी अविभाजनशील इकाई मानती थीं जिसका हर पहलू एक-दूसरे से संश्लिष्‍ट और अन्योन्याश्रयी है। लंदन में एक दिन स्‍वामी विवेकानंद के श्रीमुख से उनकी वक्‍तृता सुनकर इनमें अकस्‍मात परिवर्तन हुआ। २8 वर्षीय मिस मार्गरेट नोबुल, जो आयरिश थी, स्‍वामी जी की वाणी से इतनी अभिभूत हो उठीं कि भगिनी निवेदिता के रूप में उनका शिष्‍यत्‍व ग्रहण कर वह अपनी संवेदना, हृदय में उभरती असंख्य भाव-लहरियों को बाँध न सकी और भारत के साथ उनका घनिष्‍ठ रागात्‍मक संबंध कायम हो गया।

     ऐसा लगता था जैसे वह भारत की मिट्टी से उपजी हों या स्‍वर्ग दुहिता-सी अपने प्रकाश से यहाँ के अंधकार को दूर करने आई हों। ज्‍यों ही वे इधर आईं देशव्यापी पुनर्जागरण के साथ-साथ शिक्षा, धर्म और संस्‍कृति के क्षेत्र में उन्हें क्रांतिकारी परिवर्तन करने की आवश्यकता अनुभव हुई।

प्रश्न :

१. ______

२. ______

३. ______

४. ______

५. ______


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

उन दिनों बापू की हिन्दी अच्छी नहीं थी, पर वे अपनी अट-पट वाणी में ही अपना सारा आशय कह डालते थे। वे शब्दों में बोलते कहाँ थे, उनका हृदय बोलता था। उनका व्यक्तित्व बोलता था, उनकी साधना बोलती थी और उनके बोल हृदय में घुल जाते थे, कान बेकार खड़े रहते थे। मैं बहुत दिन यही समझता रहा कि ‘वक्त के साथ दगाबाजी’ बापू की अट-पटी हिन्दी का एक नमूना है। पता नहीं, वे क्या कहना चाहते थे और हिन्दी में उनको यही शब्द सुलभ हो पाए। पर जब सोचता हूँ बापू बिल्कुल यही कहना चाहते थे और जो वे कहना चाहते थे, उसको दूसरे शब्दों में नहीं कहा जा सकता। एक शब्द एक मात्रा से कम नहीं। बापू बनिया थे, अपने बनियेपन पर उन्हें गर्व था। शायद शब्दों के मामले में वे सबसे अधिक बनिये थे। न जरूरत से ज्यादा न जरूरत से कम। और हर शब्द सच्चा, खरा यथार्थ भरा।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए: (2)

(2) ‘वाणी का महत्व’ इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार व्यक्त कीजिए। (2)


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हो:

व्यापार और वाणिज्य ने यातायात के साधनों को सुलभ बनाने में योग दिया है। यद्यपि यातायात के साधनों में उन्नति युद्धों के कारण भी हुई है, तथापि युद्ध स्थायी संस्था नहीं है व्यापार से रेलों, जहाजों आदि को प्रोत्साहन मिलता है और इनसे व्यापार को। व्यापार के आधार पर हमारे डाक-तार विभाग भी फले-फूले हैं। व्यापार ही देश की सभ्यता का मापदंड है। दूसरें देशों से जो हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति होती है, वह व्यापार के बल-भरोसे होती है। व्यापार में आयात और निर्यात दोनों ही सम्मिलित हैं। व्यापार और वाणिज्य की समृद्धि के लिए व्यापारी को अच्छा आचरण रखना बहुत आवश्यक है।

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों।

नारियल की खेती हमारे देश में लगभग एक करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करती है। देश के चार दक्षिणी प्रदेश केरल, कर्नाटक,तमिलनाडु और आस्थ्र प्रदेश में नारियल की सघन खेती की जाती है। देश का 90 प्रतिशत तक नारियल यहीं से प्राप्त किया जाता है। यहनमकीन मिट्टी में समुद्र के किनारे उगाया जाता है। जब नारियल कच्चा और हरा होता है, तब इसमें पानी भरा होता हैं। यह नारियल-नीपौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्धक होता है। गरमी के मौसम में नारियल-पानी पीकर हम अपनी प्यास बुझाते हैं। जब नारियल पकता है, तो इसकेअंदर से सफेद नारियल का फल प्राप्त होता है। यह पूजा में काम आता है। सफेद नारियल हम कच्चा भी खाते हैं, मिठाई और कई पकवानबनाने में भी इस्तेमाल करते हैं। नारियल के रेशों से गददे, थैले तथा और भी कई प्रकार की उपयोगी चीजें बनाई जाती हैं।

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों -

मुम्बई में सरयु नाम का एक नाई रहता था। उसे धन की बहुत तगी थी। उसने भगवान शकर को आराधना को। भगवान महादेव उसकी तपस्या से बहुत प्रसन्न हुए, उन्होंने उससे पूछा-वत्स ! तुम्हें क्या चाहिये ? नाई ने कहा- “भगवान, मुझे अमीर बना दो।” भगवान बोले तथास्तु ! तुम जिस चीज को छुओगे, वही स्वर्ण हो जाएगा। नाई ने सुबह-सुबह अपनी पत्नी को छू लिया, वह तुरंत स्वर्ण हो गयी।

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिसके उत्तर पद्यांश में एक-एक वाक्य में हों।

एक दिन राजा अचानक बीमार पड़ गए और उनकी तबीयत खराब होने लगी। महामंत्री ने वैद्य जी को दिखाया तो वैद्य जी कहने लगे कि राजा को अगर मैं सच बता दूँ तो वह मुझे सजा दे देगा। मंत्री ने पूछा “क्या बात है?” तब वैद्य ने कहा कि राजा शारीरिक रूप से काम नहीं करता है इसलिए बीमार रहता है। मंत्री ने राजा को इस बात की जानकारी दी। राजा अब किसान के रूप में काम करने लगा। थोड़े ही दिनों में वह स्वस्थ और प्रसन्न रहने लगा। उसने मंत्री को इस खुशी में इनाम दिया।

उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:

वाणी ईश्वर द्वारा मनुष्य को दी गईं एक बड़ी देन है। वह मनुष्य के चिंतन का फलित है और उसका साधन भी। चिंतन के बगैरे वाणी नहीं और वाणी के बगैरे चिंतन नहीं और दोनों के बगैर मनुष्य नहीं।

मनुष्य के जीवन का समाधान वाणी के संयम और उसके सदुपयोग पर निर्भर है। मनुष्य के सारे चिंतनशास्त्र वाणी पर आधारित हैं। दर्शनों का सारा प्रयास विचारों को वाणी में ठीक-से पेश करने के लिए रहा है। वाणी विचार का शरीर ही है। कोई खास विचार किसी खास शब्द में ही समाता है। इसलिए गंभीर चिंतन करने वाले निश्चित वाणी की खोजन करते रहते हैं। 

पतंजली के बारे में कहते हैं कि उसने चित्तशुद्धि के लिए योगसूत्र लिखे, शरीरशुद्धि के लिए वैद्यक लिखा और वाक्शुद्धि के लिए व्याकरण महाभाष्य लिखा।


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