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नानीजी और नानाजी ने बच्चे को बीमारी की दवा दी और उसे आराम करने को कहा। बच्चे को खाना नहीं दिया गया। क्या आपको लगता है कि उन्होंने सही किया? आपको ऐसा क्यों लगता है?

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प्रश्न

नानीजी और नानाजी ने बच्चे को बीमारी की दवा दी और उसे आराम करने को कहा। बच्चे को खाना नहीं दिया गया। क्या आपको लगता है कि उन्होंने सही किया? आपको ऐसा क्यों लगता है?

विस्तार में उत्तर
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उत्तर

हाँ, नानाजी और नानीजी ने सही किया। बीमारी में पेट को आराम देना अच्छा माना जाता है। नानाजी ने खुद कहा था कि तबियत ढीली हो तो सबसे अच्छा उपाय है भूखे रहना, इससे सारे विकार निकल जाते हैं। भारी खाना खाने से बीमारी बढ़ सकती थी। दवा, काढ़ा और पूरा आराम शरीर को जल्दी स्वस्थ होने में मदद करता है। उनका इरादा बच्चे की भलाई था, इसलिए उनकी देखभाल और निर्णय उचित था। (हाँ, आजकल डॉक्टर बीमारी में हल्का खाना जैसे: खिचड़ी, फल या खीर खाने की सलाह भी देते हैं, ताकि शरीर को ताकत मिले।)

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अध्याय 5: नहीं होना बीमार - पाठ से [पृष्ठ ६४]

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एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
अध्याय 5 नहीं होना बीमार
पाठ से | Q (ङ) | पृष्ठ ६४
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