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मनोवैज्ञानिक प्रकर्यो पर दबाव के प्रभाव की व्याख्या कीजिये - Psychology (मनोविज्ञान)

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प्रश्न

मनोवैज्ञानिक प्रकर्यो पर दबाव के प्रभाव की व्याख्या कीजिए।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

  • मनोवैज्ञानिक प्रकार्यो पर दबाव के प्रभाव:
  1. संवेगात्मक प्रभाव: वे व्यक्ति जो दबावग्रस्त होते हैं। प्रायः आकस्मिक मनः स्थिति परिवर्तन का अनुभव करते हैं तथा सनकी की तरह व्यवहार करते है, जिसके कारण वे परिवार तथा मित्रों से विमुख हो जाते हैं। कुछ स्थितियों में इसके कारण एक दुश्चक्र प्रारंभ होता है जिससे विश्वास में कमी होती है तथा जिसके कारण फिर और भी गंभीर संवेगात्मक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उदाहरण के लिए, दूरिंचता तथा अवसाद की भावनाएँ, शारीरिक तनाव में वृद्धि, मनोवैज्ञानिक तनाव में वृद्धि तथा आकस्मिक मनः स्थिति परिवर्तन।
  2. शरीर - क्रियात्मक प्रभाव - जब शारीरिक या मनोवैज्ञानिक दबाव मनुष्य के शरीर पर क्रियाशील होते हैं तो शरीर में कुछ हार्मोन, जैसे - एडनीतिन तथा कॉर्टीशोल का स्त्राव बढ़ जाता हैं। ये हार्मोन हृदयगति, रक्तचाप स्तर, चयापचय तथा शारीरिक क्रिया में विशिष्ट परिवर्तन कर देते हैं। जब हम थोड़े समय के लिए दबावग्रस्त हो तो ये शरीरिक प्रतिक्रियाएँ कुशलतापूर्वक कार्य करने में सहायता करती हैं, किन्तु दीर्धकालीक रूप से यह शरीर को अत्यधिक नुकसान पहुँचा सकती हैं। एपिनेफरीन तथा नॉरएपिनेफरोन छोड़ना, पाचक तंत्र की धीमी गति, फेफडों में वायुमार्ग का विस्तार, हृदयगति में वृद्धि तथा रक्त - वाहिकाओं का सिकुड़ना, इस प्रकार के शरीर क्रियात्मक प्रभावों के उदाहरण हैं।
  3. संज्ञानात्मक प्रभाव - यदि दबाव के कारण दाब (प्रेशर) निरंतर रूप से बना रहता है तो व्यक्ति मानसिक अतिभार से ग्रस्त हो जाता है। उच्च दबाव के कारण उत्पन्न यह पीड़ा, व्यक्ति में ठोस निर्णयों के द्वारा तर्क - वितर्क, असफलता, वित्तीय घाटा, यहाँ तक की नौकरी की क्षति भी इसके परिणामस्वरूप हो सकती है। एकाग्रता में कमी तथा न्यूनीकृत अल्पकालिक स्मृति क्षमता भी दबाव के संज्ञानात्मक प्रभाव हो सकता हैं।
  4. व्यवहारात्मक प्रभाव - दबाव का प्रभाव हमारे व्यवहार पर कम पौष्टिक भोजन करने, उत्तेजित करने वाले पदार्थो, जैसे केफीन को अधिक सेवन करने में परिलक्षित होता है। उपशामक औषधियाँ व्यसन बन सकती हैं। तथा उनके अन्य प्रभाव भी हो सकते हैं। जैसे - एकाग्रता में कठिनाई, समन्वय में कमी तथा पूर्णि या चक्कर आ जाना। दबाव के कुछ ठेठ या प्ररूपी व्यवहारात्मक प्रभाव, निद्रा - प्रतिरूपों में व्याद्यात, अनुपस्थिता में वृद्धि तथा कार्य निष्पादन में ह्यस हैं।
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मनोवैज्ञानिक प्रकार्य तथा स्वास्थ्य पर दबाव का प्रभाव
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