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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (मराठी माध्यम) ९ वीं कक्षा

‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ इस उक्‍ति पर कविता/विचार लिखिए ।

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प्रश्न

‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ इस उक्‍ति पर कविता/विचार लिखिए ।

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’

'मन चंगा तो कठौती में गंगा' यह उक्ति पंद्रहवीं शताब्दी के संत कवि रैदास जी के लिए प्रचलित है। कहते हैं कि मन शुद्ध होने पर सब कुछ शुद्ध दिखाई देने लगता है। इस उक्ति का आशय है जब हमारा अंत:करण साफ होता है, तो हमारा घर ही तीर्थ है। उदाहरण के रूप में दो व्यक्ति एक ही मंदिर में जाते हैं। एक मैले-कुचैले फटे कपड़े पहने हुए होता है और दूसरा साफ-सुथरे नए वस्त्रों व आभूषणों से सज-धजकर जाता है। गंगा स्नान करने या तीर्थयात्रा करने की कोई आवश्यकता नहीं है। एक को ईश्वर का वास्तविक दर्शन, अनुभूति व आनंद प्राप्त हो जाता है और किसी भी कार्य को करने के पीछे उद्देश्य परोपकार पूर्ण होता है, तो हमें सफलता भी मिलती है और यश भी। इसका कारण यही हैं कि एक मानसिक रूप से शुद्ध होता है, तो दूसरा शारीरिक रूप से शुद्ध होता है। इसी कारण ऐसा कहा जाता है कि 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' अर्थात कठौती (मिट्टी या लकड़ी का बना बर्तन) में रखा जल भी गंगा जल की तरह पवित्र लगने लगता है।

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मान जा मेरे मन
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अध्याय 1.4: मान जा मेरे मन - स्वाध्याय [पृष्ठ १०]

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बालभारती Hindi (Composite) Lokvani Standard 9 Maharashtra State Board
अध्याय 1.4 मान जा मेरे मन
स्वाध्याय | Q २ | पृष्ठ १०
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