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प्रश्न
'मान जा मेरे मन' निबंध का आशय अपने शब्दों में प्रस्तुत कीजिए ।
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उत्तर
'मान जा मेरे मन'
प्रस्तुत निबंध 'मान जा मेरे मन' यह एक हास्य 'व्यंग्यात्मक निबंध है। इस निबंध के माध्यम से लेखक ने मन के अनियंत्रित हो जाने पर उससे होने वाले दुष्परिणाम की ओर संकेत किया है। जैसे रिक्शेवाले अपने रिक्शे में उसे बैठाना नहीं चाहते। डॉक्टर के अनुसार उसे कसरत करना चाहिए, खाना कम कर देना चाहिए। मोटापा की समस्या को आधार बनाकर लेखक ने मन पर मनुष्य के नियंत्रण की असमर्थता व्यक्त की है। लेखक चाहता है सुबह उठकर खुले मैदान में दौड़े, दंड-बैठक करे, खाना बंद कर दे। परंतु उसका मन सहयोग नहीं करता। इसलिए लेखक का संकल्प पूरा नहीं हो पाता। अचानक एक दिन लेखक को अपने शरीर का वजन ज्यादा लगने लगता हैं। लेखक और मन के बीच वाद-बिवाद होता हैं और लेखक मन का साथ पाने की उम्मीद भी करने लगता हैं। इस निबंध का आशय यह है कि मन और शरीर दोनों एक-दूसरे के पूरक होते हैं। मन के प्रति 'लापरवाह हो जाने पर बाद में वह धीरे-धीरे हमें लापरवाह बनाने लगता है। केवल मन से योजना बना लेने पर कार्य सिद्ध नहीं हों जाता, बल्कि उसके लिए शारीरिक श्रम की भी आवश्यकता होती है। मन और शरीर के आपसी तालमेल से न केवल शारीरिक व मानसिक समस्या का बल्कि समस्त भौतिक व अभौतिक समस्याओं का निदान संभव है मन से निरर्थक गुहार लगाते फिरेंगे- “मान जा मेरें मन ।'


