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प्रश्न
''मैं हर पेड़ को अपना दुश्मन समझ रहा था।''
• लेखक पेड़ों को दुश्मन क्यों समझ रहा था?
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उत्तर
बस की हालत ऐसी थी जिसे देखकर कोई भी व्यक्ति को संदेह होता परन्तु लेखक ने फिर भी उसमें बैठने की गलती की। लेकिन उसे अपनी गलती का अहसास तब हुआ जब बस स्टार्ट हो गई और उसमें बैठकर यात्रा करते हुए उसे इस बात को पूरा यकीन हो गया कि ये बस कभी भी धोखा दे सकती है। मार्ग में चलते हुए उसे हर वो चीज़ अपनी दुश्मन सी लग रही थी जो मार्ग में आ रही थी। फिर चाहे वो पेड़ हो या कोई झील। उसे पूरा यकीन था कि बस कब किसी पेड़ से टकरा जाए और उनके जीवन का अंत हो जाए। इसी विश्वास ने लेखक को पूरी तरह भयभीत किया हुआ था कि अब कोई दुर्घटना घटी और हमारे प्राण संकट में पड़ गए।
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(क) अमीर खुसरो
(ख) कबीर
(ग) गुरू नानक
(घ) रहीम
मान लो तुम लेखक के घर की एक गौरैया हो। अब अपने साथी गौरैया को बताओ कि तुम्हारे साथ इस घर में क्या-क्या हुआ?
नीचे लिखे वाक्य को अपने ढंग से सार्थक रूप में तुम जिस तरह भी लिख सकते हो वैसे लिखो।
उसने बादलों को जी भर निहारा।
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वचन बदलो।
सिपाही ने राजू पर गोली चलाई।
सिपाहियों ने ______________
नीचे दी गई तालिका में मारिया की और तुम अपनी पसंद लिखो -
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क्र. सं. |
मारिया की पसंद |
तुम्हारी पसंद | |
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(क) |
भारतीय खाना |
______ |
______ |
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(ख) |
शहर |
______ |
______ |
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(ग) |
फ़िल्म |
______ |
______ |
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(घ) |
कलाकार |
______ |
______ |
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(ङ) |
भाषा |
______ |
______ |
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(च) |
भारतीय पोशाक |
______ |
______ |
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(छ) |
कार्यक्रम |
______ |
______ |
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