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महत्त्वाकांक्षाओं का कभी अंत नहीं होता', विषय पर अपनेविचार व्यक्त कीजिए।

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प्रश्न

महत्त्वाकांक्षाओं का कभी अंत नहीं होता', विषय पर अपने
विचार व्यक्त कीजिए।

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उत्तर

महत्त्वाकांक्षाओं का कभी अंत नहीं होता। एक के पूरा होते ही दूसरी जन्म ले लेती है। इच्छा, कामना, लालसा ये सब महत्वाकांक्षा के ही पर्याय हैं। महत्वाकांक्षा मन की ऊँची उड़ान है। कुछ कर गुजरने की तीव्र अभिलाषा है। यह आकाश की तरह अनंत है। महत्वाकांक्षा ही है, जो एक औसत विद्यार्थी को कुशाग्र बनाती है। एक क्लर्क से अफसर, अध्यापक से लेक्चरर बनाती है। महत्वाकांक्षा व्यक्ति को निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देती है। मनुष्य के जीवन को एक दिशा देती है। विकास के लिए, आगे बढ़ने के लिए महत्त्वाकांक्षी होना उचित है। मनुष्य को महत्त्वाकांक्षी तो होना ही चाहिए कि किस प्रकार मैं नित्य आगे बढ़ता रहूँ। महत्वाकांक्षा मनुष्य को अपना लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में अधिकाधिक प्रयास करने को प्रेरित करती है। परंतु सिक्के का दूसरा पहलू भी है। महत्त्वाकांक्षा उस समय बुरी है जब इसके कारण मनुष्य अधर्म, अनीति के मार्ग पर चलने लगता है। अधर्म के मार्ग पर चलकर किया जाने वाला प्रत्येक कार्य पतन की ओर ले जाता है।

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गद्य (Prose) (11th Standard)
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अध्याय 10: महत्त्वाकांक्षा और लोभ - अभिव्यक्ति [पृष्ठ ५४]

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बालभारती Hindi Yuvakbharati [English] Standard 11 Maharashtra State Board
अध्याय 10 महत्त्वाकांक्षा और लोभ
अभिव्यक्ति | Q 2 | पृष्ठ ५४

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