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क्या कारण है कि वुर्ट्ज़ अभिक्रिया से विषम संख्या कार्बन परमाणु वाले विशुद्ध ऐल्केन बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं की जाती? एक उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

क्या कारण है कि वुर्ट्ज़ अभिक्रिया से विषम संख्या कार्बन परमाणु वाले विशुद्ध ऐल्केन बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं की जाती? एक उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

विषम संख्या कार्बन परमाणु युक्त ऐल्केनों के बनाने में दो ऐल्किल हैलाइडों का प्रयोग किया जाता है। ये दो ऐल्किल हैलाइड तीन भिन्न प्रकारों से अभिकृत होकर वांछित ऐल्केन के स्थान पर तीन ऐल्केनों का मिश्रण बनाते हैं। 1-ब्रोमोप्रोपेन तथा 1-ब्रोमोब्यूटेन की वुर्ट्ज़ अभिक्रिया से हैक्सेन, हेप्टेन तथा ऑक्टेन का मिश्रण प्राप्त होता है जैसा कि नीचे प्रदर्शित है-

\[\ce{CH3CH2\underset{\text{1-ब्रोमोप्रोपेन}}{CH2 - Br + }2Na + Br - \underset{\text{1-ब्रोमोप्रोपेन}}{CH2CH2CH3} ->[\text{शुष्क ईथर}][\triangle - 2NaBr] \underset{\text{हैक्सेन}}{CH3CH2CH2CH2CH2CH3}}\]

\[\ce{CH3CH2\underset{\text{1-ब्रोमोप्रोपेन}}{CH2 - Br} + 2Na  +Br - CH2\underset{\text{1-ब्रोमोब्यूटेन}}{CH2CH2CH3} ->[\text{शुष्क ईथर}][\triangle - 2NaBr] \underset{\text{हेप्टेन}}{CH3CH2CH2CH2CH2CH2CH3}}\]

\[\ce{CH3CH2CH2CH2 - Br + 2Na + Br - CH2CH2CH2CH3 ->[\text{शुष्क ईथर}][\triangle - 2NaBr] -> \underset{\text{ऑक्टेन}}{CH3CH2CH2CH2CH2CH2CH2CH3}}\]

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ऐल्केन - ऐल्केन का संरुपण
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अध्याय 9: हाइड्रोकार्बन - अभ्यास [पृष्ठ ४०५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Rasayan bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 11
अध्याय 9 हाइड्रोकार्बन
अभ्यास | Q 13.25 | पृष्ठ ४०५
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