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प्रश्न
कविता में वर्णित प्रसंग सीता स्वयंवर की सभा का है। प्राचीन भारतीय समाज में वर चयन के लिए स्वयंवर की प्रथा प्रचलित थी। इसके अनेक उदाहरण मिलते हैं। ऐसी किसी एक पौराणिक ऐतिहासिक आदि घटना/ प्रसंग का वर्णन कीजिए जिससे स्वयंवर विधि द्वारा विवाह की जानकारी मिलती है।
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उत्तर
स्वयंवर प्रथा का एक प्रसिद्ध उदाहरण महाभारत काल की द्रौपदी स्वयंवर घटना में मिलता है।
पांचाल नरेश द्रुपद ने अपनी पुत्री द्रौपदी के विवाह हेतु स्वयंवर का आयोजन किया था। इसमें यह चुनौती रखी गई थी कि जो भी वीर योद्धा एक घूमती हुई यंत्र-मछली की आँख को केवल उसके प्रतिबिंब को देखकर धनुष से भेद देगा, वही द्रौपदी का वर बनेगा। यह कार्य अत्यंत कठिन था और अधिकांश राजाओं के लिए लगभग असंभव माना जा रहा था।
अनेक राजकुमारों और राजाओं ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया, परंतु कोई भी सफल नहीं हो सका। अंत में अर्जुन, जो उस समय ब्राह्मण के वेश में थे, ने अत्यंत एकाग्रता और कौशल के साथ लक्ष्य को भेद दिया। परिणामस्वरूप द्रौपदी का विवाह अर्जुन से हुआ और बाद में परिस्थितियों के अनुसार वह पाँचों पांडवों की पत्नी बनीं।
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि प्राचीन समय में स्वयंवर केवल वर चुनने की प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह वीरता, योग्यता और कौशल की कठोर परीक्षा भी हुआ करती थी।
