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प्रश्न
कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसे व्यक्ति से मिले हैं, जो हमेशा बीती बातों में खोया रहता है। आप उसे समझाने के लिए क्या-क्या कहेंगे?
कृति
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उत्तर
मैं उस व्यक्ति से इस तरह कहूँगा —
- भाई, जो बीत गई सो बात गई। बीती हुई बातें दोबारा नहीं बदली जा सकतीं, तो उन्हें बार-बार सोचकर अपना मन क्यों दुखाना?
- बीते दुःखों को सोचने से वे वापस नहीं आते, लेकिन हमारा आज और कल ज़रूर बिगड़ जाता है। बीती बातों में खोने से दुर्जन हँसते हैं और चित्त में खटका बना रहता है।
- जैसे बहता पानी और बीता समय वापस नहीं लौटते, वैसे ही बीती हुई बातें भी वापस नहीं आतीं।
- चलो, आज से हम गिरिधर कविराय की सीख अपनाते हैं — “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।” आज के काम ईमानदारी से करोगे तो आगे सुख ही सुख होगा और मन में कोई खटका नहीं रहेगा।
इस तरह मैं उसे समझाऊँगा कि बीती बात को भूलकर वर्तमान और भविष्य पर ध्यान देना ही जीवन में खुशी का रास्ता है।
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