हिंदी

किसी खुले मैदान में कोई मोटर चालक एक ऐसा रास्ता अपनाता है जो प्रत्येक 500 m के बाद उसके बाईं ओर 60° के कोण पर मुड़ जाता है। किसी दिए मोड़ से शुरू होकर मोटर चालक का तीसरे, छठे व - Physics (भौतिक विज्ञान)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

किसी खुले मैदान में कोई मोटर चालक एक ऐसा रास्ता अपनाता है जो प्रत्येक 500 m के बाद उसके बाईं ओर 60° के कोण पर मुड़ जाता है। किसी दिए मोड़ से शुरू होकर मोटर चालक का तीसरे, छठे व आठवें मोड़ पर विस्थापन बताइए। प्रत्येक स्थिति में मोटर चालक द्वारा इन मोड़ों पर तय की गई कुल पथ-लंबाई के साथ विस्थापन के परिमाण की तुलना कीजिए।

संख्यात्मक
Advertisements

उत्तर

मोटर चालक द्वारा अपनाया गया मार्ग एक समषट्भुज ABCDEF आकार का होगा।

(a) माना कि मोटर चालक शीर्ष A से चलना प्रारंभ करता है।तो वह शीर्ष D पर तीसरा मोड़ लेगा। प्रश्नानुसार,

AB = BC = CD = DE = EF = FA = 500 m

∴ तीसरे मोड़ पर विस्थापन ,

= AD = 2 × AB (समषट्भुज के गुण से)

= 2 × 500 m = 1000 m = 1 km

जबकि कुल पथ की लंबाई

= AB+ BC + CD

= (500 + 500 + 500) m
= 1500 m = 1.5 km

∴ विस्थापन : पथ-लंबाई = 1 km : 1.5 km = 2:3

(b) मोटर चालक छठा मोड़ शीर्ष A पर लेगा अर्थात् इस क्षण मोटर चालक अपने प्रारंभिक बिंदु पर पहुँच चुका होगा।

∴ विस्थापन = शून्य।

जबकि कुल पथ-लंबाई = AB + BC + CD + DE + EF + FA

= 6 × AB = 6 × 500 m

= 3000 m = 3 km

विस्थापन : पथ-लंबाई = 0:3 km = 0

(c) मोटर चालक आठवाँ मोड़ शीर्ष C पर लेगा।

∴ विस्थापन AC = `sqrt("AB"^2 + "BC"^2 + 2  "AB"."BC"   "cos"60^circ)`

= `sqrt((500)^2 + (500)^2 + 2 xx 500 xx 500 xx 1/2) `

= `500sqrt3  "m"`

जबकि कुल पथ - लंबाई = 8 × AB  = 8 × 500 m = 4000 m

∴ विस्थापन : पथ - लंबाई = `(500sqrt(3))/4000`

= `sqrt(3)/8`

shaalaa.com
किसी समतल में गति
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 3: समतल में गति - अभ्यास [पृष्ठ ४८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Bhautiki bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 11
अध्याय 3 समतल में गति
अभ्यास | Q 3.10 | पृष्ठ ४८

संबंधित प्रश्न

कोई साइकिल सवार किसी वृत्तीय पार्क के केंद्र O से चलना शुरू करता है तथा पार्क के किनारे P पर पहुँचता है। पुनः वह पार्क की परिधि के अनुदिश साइकिल चलाता हुआ QO के रास्ते (जैसा कि चित्र में दिखाया गया है) केंद्र पर वापस आ जाता है। पार्क की त्रिज्या 1 km है। यदि पूरे चक्कर में 10 मिनट लगते हों तो साइकिल सवार का (a) कुल विस्थापन, (b) औसत वेग तथा (c) औसत चाल क्या होगी?


कोई व्यक्ति स्थिर जल में 4.0 km/h की चाल से तैर सकता है। उसे 1.0 km चौड़ी नदी को पार करने में कितना समय लगेगा? यदि नदी 3.0 km/h की स्थिर चाल से बह रही हो और वह नदी के बहाव के लंब तैर रहा हो। जब वह नदी के दूसरे किनारे पहुँचता है तो वह नदी के बहाव की ओर कितनी दूर पहुँचेगा?


किसी बंदरगाह में 72 km/h की चाल से हवा चल रही है और बंदरगाह में खड़ी किसी नौका के ऊपर लगा झंडा N-E दिशा में लहरा रहा है। यदि वह नौका उत्तर की ओर 51 km/h की चाल से गति करना प्रारंभ कर दे तो नौको पर लगा झंडा किस दिशा में लहराएगा?


किसी दिकस्थान पर एक स्वेच्छ गति के लिए निम्नलिखित संबंध सत्य है या नहीं, यह बताइए:

`"v"_"औसत" = (1/2)("v"("t"_1) + "v"("t"_2))`

यहाँ औसत का आशय समय अंतराल t2 व t1 से संबंधित भौतिक राशि के औसत मान से है।


किसी दिकस्थान पर एक स्वेच्छ गति के लिए निम्नलिखित संबंध सत्य है या नहीं, यह बताइए:

`"v"_"औसत" =["r"("t"_2) -"r"("t"_1)]//("t"_2 - "t"_1)`

यहाँ औसत की आशय समय अंतराल t2 व t1 से संबंधित भौतिक राशि के औसत मान से है।


किसी दिक्स्थान पर एक स्वेच्छ गति के लिए निम्नलिखित संबंध सत्य है या नहीं, यह बताइए:

`"v"("t") = "v"(0) + "a"  "t"`

यहाँ औसत की आशय समय अंतराल t2 व t1 से संबंधित भौतिक राशि के औसत मान से है।


किसी दिक्स्थान पर एक स्वेच्छ गति के लिए निम्नलिखित संबंध सत्य है या नहीं, यह बताइए:

`"r"("t") = "r"(0) + "v"(0)"t"  + 1/2  "a"  "t"^2 `

यहाँ औसत की आशय समय अंतराल t2 व t1 से संबंधित भौतिक राशि के औसत मान से है।


किसी दिक्स्थान पर एक स्वेच्छ गति के लिए निम्नलिखित संबंध सत्य है या नहीं, यह बताइए:

`"a"_"औसत" = ["v"("t"_2) - "v"("t"_1)]/("t"_2 - "t"_1)`

यहाँ औसत की आशय समय अंतराल t2 व t1 से संबंधित भौतिक राशि के औसत मान से है।


किसी सदिश में परिमाण व दिशा दोनों होते हैं। क्या दिक़स्थान में इसकी कोई स्थिति होती है? क्या यह समय के साथ परिवर्तित हो सकता है? क्या दिकस्थान में भिन्न स्थानों पर दो बराबर सदिशों a व b का समान भौतिक प्रभाव अवश्य पड़ेगा? अपने उत्तर के समर्थन में उदाहरण दीजिए।


किसी सदिश में परिमाण व दिशा दोनों होते हैं। क्या इसका यह अर्थ है कि कोई राशि जिसका परिमाण व दिशा हो, वह अवश्य ही सदिश होगी? किसी वस्तु के घूर्णन की व्याख्या घूर्णन-अक्ष की दिशा और अक्ष के परितः घूर्णन-कोण द्वारा की जा सकती है। क्या इसका यह अर्थ है कि कोई भी घूर्णन एक सदिश है?


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×