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“खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे॥” का अर्थ है ‘बिना सोचे किए गए कार्य मन में चुभते रहते हैं।’ क्या आपने कभी ऐसा अनुभव किया है? उस घटना को साझा कीजिए।

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प्रश्न

“खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे॥” का अर्थ है ‘बिना सोचे किए गए कार्य मन में चुभते रहते हैं।’ क्या आपने कभी ऐसा अनुभव किया है? उस घटना को साझा कीजिए।

विस्तार में उत्तर
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उत्तर

हाँ, मैंने ऐसा अनुभव किया है। एक बार मैंने बिना सोचे-समझे अपनी परीक्षा की तैयारी टाल दी और पूरा समय खेलने में लगा दिया। परीक्षा में मेरे नंबर बहुत कम आए और घर आकर माता-पिता को बताना पड़ा। उस गलती का पछतावा कई दिनों तक मेरे मन में खटकता रहा। उस दिन मैंने सीखा कि कोई भी काम करने से पहले उसके अच्छे-बुरे परिणामों के बारे में अच्छी तरह सोच लेना चाहिए, क्योंकि बिना विचारे किए गए कार्य सुख नहीं, पछतावा ही देते हैं।

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अध्याय 6: गिरिधर कविराय की कुंडलिया - पाठ से आगे [पृष्ठ ७९]

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एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
अध्याय 6 गिरिधर कविराय की कुंडलिया
पाठ से आगे | Q (क) | पृष्ठ ७९
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