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प्रश्न
कहानी में बच्चे ने बीमारी का बहाना बनाया ताकि उसे स्कूल न जाना पड़े। क्या आपने कभी किसी कारण से बहाना बनाया है? यदि हाँ, तो उसके बारे में बताइए। उस समय आपके मन में कौन-कौन से भाव आ-जा रहे थे? आप कैसा अनुभव कर रहे थे?
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उत्तर
हाँ, मैंने भी एक बार बहाना बनाया था। उस दिन गणित का होमवर्क करना था, पर मैंने पूरा दिन खेल में बिता दिया और होमवर्क नहीं किया। अध्यापिका की डाँट से डरकर मैंने बहाना बनाया कि मुझे सिरदर्द और पेट दुख रहा था। उस समय मेरे मन में डर और घबराहट थी– लगता रहा कि कहीं झूठ पकड़ा न जाए। साथ ही अपराध-बोध भी था, क्योंकि मैंने झूठ बोलकर अपनी गलती छिपाई थी। घर पर लेटे-लेटे मुझे बहुत बोरियत हुई। दोस्तों को खेलते-हँसते देखकर जलन और पछतावा होने लगा। मुझे लगा कि इतना झूठ बोलकर बचने से तो अच्छा था कि काम करके सजा भर मिल जाती। तब मैंने ठान लिया कि आगे से मैं अपना काम समय पर करूँगा और कभी बहाना नहीं बनाऊँगा।
