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प्रश्न
कौन - सी चिकित्सा सेवार्थी को व्यक्तिगत संवृद्धि चाहने एव अपनी संभाव्यताओं की सिद्धि के लिए प्रेरित करती है? उन चिकित्साओ की चर्चा कीजिये जो इस सिद्धांत पर आधारित है।
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उत्तर
मानवतावादी - अस्तित्वरक चिकित्सा की धरना है की मनोवैज्ञानिक कष्ट व्यक्ति के अकेलेपन, विसंबंधिन तथा जीवन का अर्थ समझने और यथार्थ संतुष्टि प्राप्त करने में योग्ग्य्ता की भावनाओ के कारण उतपन्न होते है। मनुष्य व्यक्तिगत संवृद्धि एवं आत्मसिद्धि की इच्छा तथा संवेगात्मक रूप से विकसित होने की सहज आवयश्कता से प्रेरित होते है। जब समाज और परिवार के द्वारा ये आवश्यकता बधित की जाती है तो मनुष्य मनोवैज्ञनिक कष्ट का अनुभव करता है। आत्मसिद्धि को सहज शक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है।
हो व्यक्ति को जटिल, संतुलित और समाकलित होने के लिए अथार्त बिना खंडित हुए जटिलता एवं संतुलन प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है। जब सेवार्थी अपने जीवन में आत्मसिद्धि के लिए आवश्यक है संवेगो की मुक्ति अभिव्यक्ति। इसमें मूल पूर्व धरना यह है की वेसारथी को अपने व्यवहारो का नियंत्रण करने की स्वतंत्रता है तथा यह उसका ही उत्तरदायी है। चिकित्सक केवल एक सुगमकर्ता और मार्गदर्शन होता है। चिकित्सा की सफलता के लिए सेवार्थी सव्य उत्तदायी होता है। चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य सेवार्थी की जागरूकता को बढ़ाना है। जैसे - जैसे सेवार्थी अपनी व्यक्तिगत अनुभवों को समझने लगता है वह स्वस्थ होने लगता है। सेवार्थी आत्मसंवृद्धि की प्रक्रिया को प्रारंभ करता है।
