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जल विभव का संक्षिप्त वर्णन करें। कौन से कारक इसे प्रभावित करते हैं? जल विभव, विलेय विभव तथा दाब विभव के आपसी संबंधो की व्याख्या करें।

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प्रश्न

जल विभव का संक्षिप्त वर्णन करें। कौन से कारक इसे प्रभावित करते हैं? जल विभव, विलेय विभव तथा दाब विभव के आपसी संबंधो की व्याख्या करें।

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

शुद्ध जल का सबसे अधिक जल विभव होता है; क्योकि

  1. जल अणुओं में गतिज ऊर्जा पाई जाती है। यह तरल और गैस दोनों अवस्था में गति करते हुए पाए जाते हैं। गति स्थिर तथा तीव्र दोनों प्रकार की हो सकती है।
  2.  किसी माध्यम में यदि अधिक मात्रा में जल हो तो उसमें गतिज ऊर्जा तथा जल विभव अधिक होगा। शुद्ध जल में सबसे अधिक जल विभव होता है।
  3.  जब दो जल तन्त्र परस्पर सम्पर्क में हों तो पानी के अणु उच्च जल विभव (या तनु घोल) वाले तन्त्र से कम जल विभव (सान्द्र घोल) वाले तन्त्र की ओर जाते हैं।
  4. जल विभव को ग्रीक चिह्न Ψ (Psi) से चिह्नित करते हैं। इसे पास्कल दाब इकाई में व्यक्त किया जाता है।
  5. मानक परिस्थितियों में शुद्ध जल का विभव शून्य होता है।
  6.  किसी विलयन तन्त्र का जल विभव उस विलयन से जल बाहर निकलने की प्रवृत्ति का मापन करता है। यह प्रवृत्ति ताप एवं दाब के साथ बढ़ती जाती है, लेकिन विलेय की उपस्थिति के कारण घटती है।
  7.  शुद्ध जल में विलेय को घोलने पर घोल में जल की सान्द्रता और जल विभव कम होता जाता है। अतः सभी विलयनों में शुद्ध जल की अपेक्षा जल विभव कम होता है। जल विभव के कम होने का कारण विलेय विभव होता है। इसे परासरण विभव भी कहते हैं। जल विभव तथा विलेय विभव ऋणात्मक होता है। कोशिका द्वारा जल अवशोषित करने के फलस्वरूप कोशिका भित्ति पर दबाव पड़ता है, जिससे यह आशून (स्फीत) हो जाती है। इसे दाब विभव कहते हैं। दाब विभव प्रायः सकारात्मक होता है, लेकिन जाइलम के जल स्तम्भ में ऋणात्मक दाब विभव रसारोहण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  8. किसी पादप कोशिका में जलीय विभव (Ψ) तीन बलों द्वारा नियन्त्रित होता है-दाब विभव (Ψp) परासरणीय विभव या विलेय विभव (Ψs ) तथा मैट्रिक्स विभव (Ψn)। मैट्रिक्स विभव प्रायः नगण्य होता है। अतः कोशिका के जलीय विभव की गणना निम्नलिखित सूत्रानुसार करते हैं
    Ψ = Ψp + Ψs
  9. जीवद्रव्यकुंचित कोशिका का जलीय विभव परासरणीय विभव के बराबर होता है; क्योंकि दाब विभव शून्य होता है। पूर्ण स्फीत कोशिका में दाब विभव और परासरणीय विभव के बराबर हो जाने से जलीय विभव शून्य हो जाता है।
  10. जल विभव सान्द्रता, प्रवणता और दाब से प्रभावित होता हैं।
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पादप-जल संबंध - जल विभव या जल अंतःशक्ति
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