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प्रश्न
जब साबुन को जल में डाला जाता है तो मिसेल का निर्माण क्यों होता है? क्या एथनॉल जैसे दूसरे विलायकों में भी मिसेल का निर्माण होगा।
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उत्तर
- साबुन के अणु ऐसे होते हैं, जिनके दोनों सिरों के विभिन्न गुणधर्म होते हैं। जल में विलेय एक सिरे को जलरागी कहते हैं तथा हाइड्रोकार्बन में विलेय दूसरे सिरे को जलविरागी कहते हैं।
- जब साबुन जल की सतह पर होता है तब इसके अणु अपने को इस प्रकार व्यवस्थित कर लेते हैं कि इसका आयनिक सिरा जल के अंदर होता है। जबकि हाइड्रोकार्बन पूँछ (दूसरा छोर) जल के बाहर होती है।
- जल के अंदर इन अणुओं की एक विशेष व्यवस्था होती है, जिससे इसका हाइड्रोकार्बन सिरा जल के बाहर बना होता है। ऐसा अणुओं का बड़ा गुच्छा बनने के कारण होता है, जिसमें जलविरागी पूँछ गुच्छे के आंतरिक हिस्से में होती है, जबकि उसका आयनिक सिरा गुच्छे की सतह पर होता है। इस संरचना को मिसेल कहते हैं।
- मिसेल के रूप में साबुन स्वच्छ करने में सक्षम होता है, क्योंकि तैलीय मैल मिसेल के केंद्र में एकत्र हो जाते हैं। मिसेल विलयन में कोलॉइड के रूप में बने रहते है तथा आयन-आयन विकर्षण के कारण वे अवक्षेपित नहीं होते।
- इस प्रकार मिसेल में तैरते मैल आसानी से हटाए जा सकते हैं। साबुन के मिसेल प्रकाश को प्रकीर्णित कर सकते हैं। यही कारण है कि साबुन का घोल बादल जैसा दिखता है।
- एथनॉल ध्रुवीय विलायक नहीं होता है, इसलिए एथनॉल जैसे अन्य विलायकों में मिसेल नहीं बनेगा।
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साबुन और अपमार्जक
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