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निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-जपमाला, छापैं, तिलक सरै न एकौ कामु।मन-काँचै नाचै बृथा, साँचै राँचै रामु।।

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प्रश्न

निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-
जपमालाछापैंतिलक सरै न एकौ कामु।
मन-काँचै नाचै बृथासाँचै राँचै रामु।।

एक पंक्ति में उत्तर
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उत्तर

बिहारी का मानना है कि बाहरी आडम्बरों से ईश्वर नहीं मिलते। माला फेरनेहल्दी चंदन का तिलक लगाने या छापै लगाने से एक भी काम नहीं बनता। कच्चे मन वालों का हृदय डोलता रहता है। वे ही ऐसा करते हैं लेकिन राम तो सच्चे मन से याद करने वाले के हृदय में रहते हैं।

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