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प्रश्न
‘जैसा करोगे वैसा भरोगे’ विषय पर लघु कथा लगभग 100 शब्दों में लिखिए।
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उत्तर
यह कोई विश्वास, अंधविश्वास या मात्र कहावत नहीं है बल्कि तार्किक सत्य है जैसा हम करते हैं वैसा ही हमें मिलता है। जीवन में अक्सर छोटी-बड़ी ऐसी घटनाएँ होती रहती हैं जो हम बार-बार इस बात का एहसास कराती है ऐसी ही एक घटना लगभग 1 वर्ष पहले घटी। हम सपरिवार घूमने जार रहे थे। मेरे पिताजी कार चला रहे थे हम तीन बच्चे पीछे, मम्मी पापा आगे बैठे थे। अक्सर पिताजी कार चलाते समय गति को नियंत्रण में नहीं रखते हैं जिसके लिए माँ और हम उन्हें समय-समय पर कहते भी हैं किंतु वह अपनी धुन में तेज गति से कार चलाना चलाने में ही आनंद लेते हैं। हमने अपनी मंजिल पर 11 : 00 बजे पहुँचना था। घर से निकलने में कुछ देर हो गई माँ ने बैठते ही कहा कि भले ही देर से पहुँचे, पर गाड़ी ध्यान से चलाइएगा। पिताजी ने रफ़्तार पकड़ी और कहीं-कहीं तो यातायात के नियमों का उल्लंघन करते हुए चलते गए, इस विचार से कि कोई फर्क नहीं पड़ता। किंतु वास्तव में फर्क पड़ता है। पर इस बात उन्हें तब समझ आई जब आगे चलकर हमारे साथ भयंकर दुर्घटना घटी। 120 की रफ्तार से कार चल रही थी अचानक सड़क पर न जाने कहाँ से एक गाय आ गई। पिताजी रफ़्तार को नियंत्रित नहीं कर सके और तेज ब्रेक लगाने के कारण गाय को तो चोट आई ही, हमारी गाड़ी भी तेज ब्रेक लगाने के कारण पलट गई हम तीनों बच्चों को चोटें आई, माँ गंभीर रूप से घायल हो गई और पिताजी की भी हाथ और पैर की हड्डी टूट गई। यदि यातायात के नियमों का पालन किया गया होता, तो ऐसी दुर्घटना न घटती, हम अपनी मंजिल समय से पहुँच जाते। किंतु हमने नियम तोड़े, अपने लिए स्वयं ही असुरक्षा के इंतजाम किए, तो हमें दंड भोगना पड़ा। मगर हमेशा के लिए एक बड़ा सबक सीख लिया-जैसो करोगे, वैसा भरोगे।
Notes
- औपचारिकताएँ – 1 अंक
- विषयवस्तु – 2 अंक
- प्रस्तुति – 1 अंक
- भाषा – 1 अंक
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