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हम जाने-अनजाने उत्पाद को समर्पित होते जा रहे हैं’ -का आशय उपभोक्तावाद की संस्कृति के आधार पर कीजिए।

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प्रश्न

हम जाने-अनजाने उत्पाद को समर्पित होते जा रहे हैं’ -का आशय उपभोक्तावाद की संस्कृति के आधार पर कीजिए।

एक पंक्ति में उत्तर
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उत्तर

‘हम जाने-अनजाने उत्पाद को समर्पित होते जा रहे हैं’ का आशय यह है कि वस्तुओं की आवश्यकता और उसकी गुणवत्ता पर ध्यान दिए बिना वस्तुओं को खरीदकर उनका उपभोग कर लेना चाहते हैं। ऐसा लगता है जैसे हम उपभोग के लिए बने हो।

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गद्य (Prose) (Class 9 A)
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अध्याय 3: उपभोक्तावाद की संस्कृति - अतिरिक्त प्रश्न

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एनसीईआरटी Hindi Kshitij Bhag 1 [English] Class 9
अध्याय 3 उपभोक्तावाद की संस्कृति
अतिरिक्त प्रश्न | Q 2

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