हिंदी

गोपालसिंह नेपाली की कविता ‘हिमालय और हम’, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता ‘हिमालय’ तथा जयशंकर प्रसाद की कविता ‘हिमालय के आँगन में पढ़िए और तुलना कीजिए। - Hindi (हिंदी)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

गोपालसिंह नेपाली की कविता ‘हिमालय और हम’, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता ‘हिमालय’ तथा जयशंकर प्रसाद की कविता ‘हिमालय के आँगन में पढ़िए और तुलना कीजिए।

संक्षेप में उत्तर
Advertisements

उत्तर

कविता-हिमालय और हम
कवि-गोपालसिंह नेपाली

  1. इतनी ऊँची इसकी चोटी कि सकल धरती का ताज यही ।
    पर्वत–पहाड़ से भरी धरा पर केवल पर्वतराज यही
    अंबर में सिर-पाताल चरन
    मन इसका गंगा का बचपन
    तन वरन-वरन मुख निरावरन
    इसकी छाया में जो भी है, वह मस्तक नहीं झुकाता है।
    गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा नाता है।
  2. जैसा यह अटल, अडिग-अविचल, वैसे ही हैं भारतवासी
    हैं अमर हिमालय धरती पर, तो भारतवासी अविनाशी
    कोई क्या हमको ललकारे
    हम कभी न हिंसा से हारे
    दुख देकर हमको क्या मारे
    गंगा का जल जो भी पी ले, वह दुख में भी मुसकाता है।
    गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।
  3. अरुणोदय की पहली लाली इसको ही चूम निखर जाती ।
    फिर संध्या की अंतिम लाली इस पर ही झूम बिखर जाती
    इन शिखरों की माया ऐसी ।
    जैसा प्रभात, संध्या वैसी
    अमरों को फिर चिंता कैसी
    इस धरती का हर लाल खुशी से उदय-अस्त अपनाता है।
    गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।।

इस कविता की तुलना यदि हम पाठ हिमालय से करें तो पाएँगे कि गोपाल सिंह नेपाली ने इस कविता में यह दर्शाया है कि हिमालय का भारतवासियों से प्राचीन काल से ही अत्यंत घनिष्ठ संबंध है। भारत-धरती का मुकुट हिमालय पर्वत अपनी जड़ों को पाताल तक ले जाए हुए है। उसके धवल शिखर आकाश का चुंबन करते हैं। सुबह और शाम के समय सूर्य की लालिमा इसे चूम कर निखर उठती है। इसकी छाया सागर और गंगा के समान लंबी है। यह अचल और अडिग है। बादल और तूफ़ान इससे टकराकर अपनी हार मान लेते हैं। भारतवासियों के जीवन पर हिमालय का स्पष्ट प्रभाव है क्योंकि वे भी हिमालय की तरह आत्माभिमानी और दृढ़निश्चयी है। हिमालय से निकलने वाली गंगा की पावनधारा सभी के दुखों को समाप्त कर देती है। यही कारण है कि यहाँ गांधी जैसे कर्मठ और युगचेता महापुरुषों ने जन्म लिया है।

जबकि पाठ हिमालय में लेखक नागार्जुन ने यह दर्शाया है कि हिमालय पर्वत से निकलने वाली नदियाँ किस स्वरूप से हिमालय की गोद से निकलती हैं? हिमालय उनका पिता और निकलने वाली नदियाँ उसकी बेटियाँ प्रतीत होती हैं।

shaalaa.com
गद्य (Prose) (Class 7)
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 3: हिमालय की बेटियाँ - लेख से आगे [पृष्ठ १५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Vasant Part 2 Class 7
अध्याय 3 हिमालय की बेटियाँ
लेख से आगे | Q 2 | पृष्ठ १५

संबंधित प्रश्न

पक्षी को मैदा से भरी सोने की कटोरी से कड़वी निबौरी क्यों अच्छी लगती है?


बहुविकल्पी प्रश्न

आश्रम में हर महीने कितने अतिथियों के आने की संभावना थी?


तुम्हारे विचार से महाभारत के युद्ध को कौन रुकवा सकता था? कैसे?


हर्ष का पिता समुद्र के किनारे रहता था। वह तरह-तरह के खिलौने एवं मालाएँ तैयार कर पास के बड़े नगर में बेच आता था। तुम अपने आस-पास के कुछ ऐसे ही लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त करो। वे किन-किन चीजों से क्या-क्या बनाते हैं?


पाठ के आधार पर गारो जनजाति के बारे में कुछ पंक्तियाँ लिखो।


गारो पहाड़ किस प्रदेश में हैं? मानचित्र पर उस प्रदेश का नाम लिखो।


नीचे लिखे शब्दों में सही अक्षर भरो-

वि______य


नीचे लिखे शब्दों में सही अक्षर भरो-

______ हज


बार-बार नष्ट करने की कोशिशों के बाद भी किताबें समाप्त नहीं हुईं। क्यों?


सही शब्द भरो।

साहित्य की दृष्टि से भारत का ______ महान है।


सही शब्द भरो।

उसे किताबों सहित ______ में दफ़ना दिया गया।


अपने संस्कृत शिक्षक से पूछिए कि कालिदास ने हिमालय को देवात्मा क्यों कहा है?


लाल ताऊ किस प्रकार बाकी पात्रों से भिन्न है?


बहुविकल्पी प्रश्न
आसमान में गड़गड़ाती बिजली किस पर आ गिरी थी?


माधवदास क्यों बार-बार चिड़िया से कहता है कि यह बगीचा तुम्हारा ही है? क्या माधवदास निःस्वार्थ मन से ऐसा कह रहा था? स्पष्ट कीजिए।


यासुकी-चान पेड़ पर क्यों नहीं चढ़ पाता था?


नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित मुहावरे किन भावों को प्रकट करते हैं? इन भावों से जुड़े दो-दो मुहावरे बताइए और उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए।

  • माँ ने दाँतों तले उँगली दबाई ।
  • सारी कक्षा साँस रोके हुए उसी तरफ़ देख रही है।

पाठ के किन प्रसंगों से आपको पता चलता है कि कुँवर सिंह साहसी, उदार एवं स्वाभिमानी व्यक्ति थे?


रिक्त स्थान भरो -

नमूना → गुड़िया जैसी सुंदर

दूध जैसा _______


अपने प्राणों के बलिदान का अवसर आ गया है। इस वाक्य में "प्राणों का बलिदान देना" मुहावरे का प्रयोग हुआ है।
नीचे मुहावरा दिया गया हैं। इसका अपने वाक्य में प्रयोग करो।

टूट पड़ना


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×