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प्रश्न
एक विद्यार्थी 27°C पर गोल पेंदे के फ्लास्क में अभिक्रिया-मिश्रण डालना भूल गया तथा उस फ्लास्क को ज्वाला पर रख दिया। कुछ समय पश्चात् उसे अपनी भूल का अहसास हुआ। उसने उत्तापमापी की सहायता से फ्लास्क का ताप 477°C पाया। आप बताइए कि वायु का कितना भाग फ्लास्क से बाहर निकला?
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उत्तर
खुले फ्लास्क को गर्म करने की प्रक्रिया में उसके आयतन तथा दाब को स्थिर माना जा सकता है। मानते हुए कि फ्लास्क में हवा के मोलों संख्या गर्म करने से पहले तथा बाद में, क्रमशः n1 तथा n2 है, आदर्श गैस समीकरण के अनुसार,
`"PV" = "n"_1"RT"_1 = "n"_1 xx "R" xx (273 +27)` (गर्म करने से पहले)...(i)
तथा `"PV" = "n"_2"RT"_2 = "n"_2 xx "R" xx (273 + 477)` (गर्म करने के बाद)...(ii)
समीकरण (i) को (ii) से भाग करने पर,
`1 = ("n"_1 xx 300)/("n"_2 xx 750)`
∴ `"n"_2 = 300/750 xx "n"_1`
`"n"_2 = 2/5"n"_1`
अतः गर्म करने पर निष्कासित हवा के मोलों की संख्या = `"n"_1 - "n"_2`
= `"n"_1-2/5"n"_1`
= `3/5"n"_1`
अतः निष्कासित हवा का भाग = `(3/5"n"_1)/"n"_1 = 3/5`
