हिंदी

एक उभयलिंगी पौधे में नन्हे पुंकेसरों को कृत्रिम रूप से निकाल दिए जाने पर भीफल उत्पन्न होते हैं। उपरोक्त परिस्थिति के लिए उपयुक्त व्याख्या प्रस्तुत कीजिए। - Science (विज्ञान)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

एक उभयलिंगी पौधे में नन्हे पुंकेसरों को कृत्रिम रूप से निकाल दिए जाने पर भीफल उत्पन्न होते हैं। उपरोक्त परिस्थिति के लिए उपयुक्त व्याख्या प्रस्तुत कीजिए।

संक्षेप में उत्तर
Advertisements

उत्तर

एक उभयलिंगी फूल में नर प्रजनन अंग, पुंकेसर और मादा प्रजनन अंग, स्त्रीकेसर दोनों होते हैं। यदि पुंकेसर हटा दिए जाएं तो पुष्प में स्त्रीकेसर उपस्थित होता है। क्रॉस परागण के बाद सफल निषेचन के बाद, स्त्रीकेसर का अंडाशय एक फल के रूप में विकसित हो गया होगा।

shaalaa.com
लैंगिक जनन - पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 8: जीव जनन कैसे करते हैं? - Exemplar [पृष्ठ ६९]

APPEARS IN

एनसीईआरटी एक्झांप्लर Science [Hindi] Class 10
अध्याय 8 जीव जनन कैसे करते हैं?
Exemplar | Q 28. | पृष्ठ ६९

संबंधित प्रश्न

परागण क्रिया निषेचन से किस प्रकार भिन्न है?


परागकोश में होते हैं -


पुष्प की अनुदैर्ध्य काट का नामांकित चित्र बनाइए।


पुष्प में नर और मादा युग्मकों (जनन-कोशिकाओं) को उत्पन्न करने वाले भाग कौन-से हैं?


पुष्पी पौधे में जनन अवस्थाओं का सही क्रम कौन-सा है?


पुष्पों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही है?

  1. पुष्प हमेशा उभयलिंगी होते हैं।
  2. ये लैंगिक जनन के अंग होते हैं
  3. ये पौधों के सभी वर्गों में पाए जाते हैं
  4. निषेचन के बाद इनसे फल बनते हैं।

एकलिंगी पुष्पों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

  1. इनमें पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों होते हैं।
  2. इनमें या तो पुंकेसर होते हैं अथवा स्त्रीकेसर होते हैं
  3. इनमें परागण होता है
  4. वे एकलिंगी पुष्प जिनमें केवल पुंकेसर होते हैंफल उत्पन्न नहीं कर पाते

जिन पुष्पों में परागण नहीं होता है तो ऐसे पुष्पों में निषेचन क्यों नहीं हो सकता?


जनन के अलैंगिक और लैंगिक प्रकारों के बीच दो अंतर बताइए लैंगिक जनन से उत्पन्न संततियों के बीच विविधता क्यों पायी जाती है? व्याख्या कीजिए।


एक युग्मक और युग्मनज के बीच अंतर बताइए। लैंगिक जनन में उनकी भूमिका की व्याख्या कीजिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×