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प्रश्न
द्वितीय आवर्त के तत्वों में वास्तविक आयनन एन्थैल्पी का क्रम इस प्रकार है- Li < B < Be < C < O < N < F < Ne। व्याख्या कीजिए कि Be की ∆iH, B से अधिक क्यों है?
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उत्तर
Be तथा B के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नांकित प्रकार हैं-
4Be = 2, 2 या 1s2 2s2
5B = 2, 3 या 1s2 2s2 2p1
बोरॉन (B) में, इसके एक 2p कक्षक में एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है।
बेरिलियम (Be) में युग्मित: इलेक्ट्रॉनों वाले पूर्ण-पूरित 1s तथा 2s कक्षक हैं।
जब हम एक ही मुख्य क्वांटम ऊर्जा स्तर पर विचार करते हैं तो s-इलेक्ट्रॉन, p-इलेक्ट्रॉन की तुलना में नाभिक की ओर अधिक आकर्षित होता है। बेरिलियम में बाह्यतम इलेक्ट्रॉन, जो अलग किया जाएगा, वह s-इलेक्ट्रॉन होगा, जबकि बोरॉन में बाह्यतम इलेक्ट्रॉन (जो अलग किया जाएगा) p-इलेक्ट्रॉन होगा। उल्लेखनीय है कि नाभिक की ओर 2s-इलेक्ट्रॉन का भेदन (penetration) 2p-इलेक्ट्रॉन की तुलना में अधिक होता है। इस प्रकार बोरॉन का 2p-इलेक्ट्रॉन बेरिलियम के 2s-इलेक्ट्रॉन की तुलना में आतंरिक क्रोड इलेक्ट्रॉनों द्वारा अधिक परिरक्षित होता है। चूँकि बेरिलियम के 2s-इलेक्ट्रॉन की तुलना में बोरॉन को 2p-इलेक्ट्रॉन अधिक सरलता से पृथक् हो जाता है; अत: बेरिलियम की तुलना में बोरॉन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (∆iH) का मान कम होगा।
