Advertisements
Advertisements
प्रश्न
बिरजू महाराज– “कथक की पुरानी परंपरा को तो कायम रखा है। हाँ, उसके प्रस्तुतीकरण में बदलाव किए हैं।” इस कथन को ध्यान में रखते हुए लिखिए कि कथक की प्रस्तुतियों में किस प्रकार के परिवर्तन आए हैं?
विस्तार में उत्तर
Advertisements
उत्तर
बिरजू महाराज ने कथक की पुरानी परंपरा को कायम रखा, पर उसके प्रस्तुतीकरण में निम्नलिखित परिवर्तन किए–
- बिरजू महाराज अपने पिता अच्छन महाराज तथा चाचा शंभू महाराज और लच्छू महाराज की सुंदर भाव-भंगिमाओं और खड़े होने के निराले अंदाज को कथक में शामिल कर लिया।
- तीनों गुरुओं की शिक्षा को एक साथ मिलाकर कथक का एक नया रूप तैयार किया।
- टैगोर, त्यागराज जैसे आधुनिक कवियों की रचनाओं को लेकर भी कथक की नई रचनाएँ बनाईं, जबकि पहले कथक मुख्यतः पुरानी कथाओं पर ही होता था।
- पहले नर्तक कथा के दृश्यों का बहुत विस्तृत वर्णन करते थे जैसे गोपियों का घड़ा उठाकर पनघट की ओर धीमी चाल से चलना, पीछे से कृष्ण का चुपचाप आकर कंकड़ उठाकर दे मारना आदि। अब नर्तक केवल 'पनघट की गत देखो' कहकर बाकी बात दर्शक की कल्पना पर छोड़ देता है।
- पहले मंच नहीं होते थे; फर्श पर चाँदनी बिछाकर कथक होता था और दर्शक चारों ओर बैठते थे। अब कथक मंच पर प्रस्तुत किया जाता है।
- पहले श्रृंगार के लिए चंदन लेप और होंठ रंगने के लिए पान का प्रयोग होता था, जो अब बदल गया है।
shaalaa.com
क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
