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“बचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम किसी वस्तु को अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते। हमने वस्तुओं को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है।”

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प्रश्न

“बचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम किसी वस्तु को अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते। हमने वस्तुओं को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है।”

इस लोककथा में तीनों भाई आसपास की प्रत्येक घटना, वस्तु आदि को ध्यान से देखते, सुनते, सूँघते और अनुभव करते हैं अर्थात् अपनी ज्ञानेंद्रियों और बुद्धि का पूरा उपयोग करते हैं। ज्ञानेंद्रियाँ पाँच होती है- आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा। आँख से देखकर, कान से सुनकर, नाक से सूँघकर, जीभ से चखकर और त्वचा से स्पर्श करके हम किसी वस्तु के विषय में ज्ञान प्राप्त करते हैं। आइए, अब एक खेल खेलते हैं जिसमें आपको अपनी ज्ञानेंद्रियों और बुद्धि का उपयोग करने के अवसर मिलेंगे।

'हाँ’ या ’नहीं’ प्रश्न-उत्तर खेल

चरण-

  1. एक विद्यार्थी कक्षा से बाहर जाकर दिखाई देने वाली किसी एक वस्तु या स्थान का नाम चुनेगा। कक्षा के भीतर से भी कोई नाम चुना जा सकता है।
  2. विद्यार्थी वापस कक्षा में आएगा और उस नाम को एक कागज पर लिख लेगा। लेकिन ध्यान रहे, वह कागज पर लिखे नाम को किसी को न दिखाए।
  3. अन्य विद्यार्थी बारी-बारी से उस वस्तु का नाम पता करने के लिए प्रश्न पूछेंगे।
  4. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर केवल ‘हाँ’ या ‘नहीं’ में दिया जाएगा।
    उदाहरण के लिए-
    •  क्या इस वस्तु का उपयोग कक्षा में होता है?
    • क्या यह खाने-पीने की चीज़ है? 
    •  क्या यह लकड़ी से बनी है?
    • क्या यह बिजली से चलती है?
  5. सभी विद्यार्थी अधिकतम 20 प्रश्न ही पूछ सकते हैं। इसलिए उन्हें सोच-समझकर प्रश्न पूछने होंगे ताकि वे उस वस्तु का नाम पता कर सकें।
  6. यदि 20 प्रश्नों के अंदर विद्यार्थी वस्तु का सही अनुमान लगा लेते हैं तो वे जीत जाएँगे।
  7. अब दूसरे विद्यार्थी को बाहर भेजकर गतिविधि दोहराएँगे।
  8. गतिविधि के अंत में सभी मिलकर इस खेल से जुड़े अपने अनुभवों के बारे में चर्चा करें।
विस्तार में उत्तर
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उत्तर

इस गतिविधि में हमने “पंखा” वस्तु को चुना।

  1. क्या इस वस्तु का उपयोग कक्षा में होता है? – हाँ
  2. क्या यह खाने-पीने की चीज़ है? – नहीं
  3. क्या यह लकड़ी से बनी है? – नहीं
  4. क्या यह बिजली से चलती है? – हाँ
  5. क्या यह हमें हवा देती है? – हाँ

इन संकेतों के आधार पर हमने वस्तु का नाम “पंखा” पहचान लिया।

अनुभव : इस खेल से हमें ध्यानपूर्वक सोचने, सही प्रश्न पूछने और अपनी ज्ञानेंद्रियों तथा बुद्धि का उचित उपयोग करने का अभ्यास मिला।

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अध्याय 2: तीन बुद्धिमान - पाठ से आगे [पृष्ठ २७]

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एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
अध्याय 2 तीन बुद्धिमान
पाठ से आगे | Q (क) | पृष्ठ २७
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