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B-Cl आबंध द्विध्रुव आघूर्ण रखता है, किन्तु BCl3 अणु का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है। क्यों?

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प्रश्न

B-Cl आबंध द्विध्रुव आघूर्ण रखता है, किन्तु BCl3 अणु का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है। क्यों?

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

बोरॉन की विद्युत ऋणात्मकता 2, जबकि Cl की 3 होती है। विद्युत ऋणात्मक में अंतर के कारण, B-Cl बंध पोलर हो जाता है और निश्चित द्विध्रुव आघूर्ण रखता है। BCl3 अणु में B परमाणु के sp2 संकरित होने के कारण यह एक त्रिकोणीय समतलीय अणु है। BCl3 में तीन B-Cl बंध 120° पर एक ही तल में होते हैं। इसलिए दो B-Cl बंधों के द्विध्रुव आघूर्ण का परिमाण तीसरे B-Cl बंध के द्विध्रुव आघूर्ण के परिमाण के बराबर तथा विपरीत दिशा में होता है। परिणामस्वरूप BCl3 का शुद्ध द्विध्रुव आघूर्ण शून्य हो जाता है जैसा निम्नांकित से स्पष्ट है-

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