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ऐलिल क्लोराइड n-प्रोपिल क्लोराइड की अपेक्षा अधिक आसानी से क्यों जलअपघटित होता है? - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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प्रश्न

ऐलिल क्लोराइड n-प्रोपिल क्लोराइड की अपेक्षा अधिक आसानी से क्यों जलअपघटित होता है?

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उत्तर

ऐलिल क्लोराइड अधिक अभिक्रियाशीलता प्रदर्शित करता है क्योंकि जलअपघटन से बना कार्बधनायन अनुनाद द्वारा स्थायित्व प्राप्त कर लेता है जबकि n-प्रोपिल क्लोराइड से बने कार्बधनायन में ऐसा स्थायित्व नहीं होता।

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रासायनिक अभिक्रियाएँ
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अध्याय 10: हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन - अभ्यास [पृष्ठ १५४]

APPEARS IN

एनसीईआरटी एक्झांप्लर Chemistry [Hindi] Class 12
अध्याय 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन
अभ्यास | Q III. 65. | पृष्ठ १५४

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एथेनॉल से ब्यूट-2-आइन


निम्नलिखित में से किस अणु में तारांकित (*) कार्बन परमाणु असममित है?

(a) \[\begin{array}{cc}
\ce{H}\\
|\\
\phantom{.}\ce{C^*}\phantom{}\\
\phantom{}/\phantom{..}|\phantom{..}\backslash\phantom{}\\
\phantom{..}\ce{I}\phantom{...}\ce{Br}\phantom{.}\ce{Cl}\phantom{.}
\end{array}\]

(b) \[\begin{array}{cc}
\ce{D}\\
|\\
\phantom{.}\ce{C^*}\phantom{}\\
\phantom{}/\phantom{..}|\phantom{..}\backslash\phantom{}\\
\phantom{..}\ce{I}\phantom{...}\ce{Br}\phantom{.}\ce{Cl}\phantom{.}
\end{array}\]

(c) \[\begin{array}{cc}
\ce{H}\\
|\\
\phantom{.}\ce{C^*}\phantom{}\\
\phantom{}/\phantom{..}|\phantom{..}\backslash\phantom{}\\
\phantom{..}\ce{HO}\phantom{..}\ce{C2H5}\phantom{}\ce{CH3}\phantom{}
\end{array}\]

(d) \[\begin{array}{cc}
\ce{H}\\
|\\
\phantom{.}\ce{C^*}\phantom{}\\
\phantom{}/\phantom{..}|\phantom{..}\backslash\phantom{}\\
\phantom{....}\ce{H}\phantom{..}\ce{C2H5}\phantom{}\ce{CH3}
\end{array}\]


निम्नलिखित में से कौन-सी संरचना नीचे दिए अणु (A) का प्रतिबिंब रूप है?


वे अणु जिनके प्रतिबिंब उन पर अध्यासित नहीं हो सकते काइरल कहलाते हैं। निम्नलिखित अणुओं में से कौन-सा अणु काइरल है?


सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ C6H5CH2Br की अभिक्रिया ______ अग्रसारित होती है।


नीचे दिए गए अणु में कौन-से कार्बन परमाणु असममित हैं?

\[\begin{array}{cc}
\phantom{}\ce{HO}\phantom{.....}\ce{OH}\phantom{..}\ce{H}\phantom{.....}\ce{O}\phantom{..}\\
\phantom{..}\backslash\phantom{.....}|\phantom{....}|\phantom{.....}//\phantom{.}\\
\ce{\overset{a}{C} - \overset{b}{C} - \overset{c}{C} - \overset{d}{C}}\\
\phantom{..}//\phantom{.....}|\phantom{....}|\phantom{....}\phantom{.}\backslash\phantom{...}\\
\phantom{}\ce{O}\phantom{......}\ce{H}\phantom{...}\ce{OH}\phantom{....}\ce{H}\phantom{}\\
\end{array}\]


निम्न यौगिकों में से कौन-सा OH आयन द्वारा नाभिकरागी प्रतिस्थापन से रेसिमिक मिश्रण देगा।

(a) \[\begin{array}{cc}
\phantom{}\ce{CH3 - CH - Br}\\
\phantom{}|\\
\phantom{....}\ce{C2H5}\phantom{}
\end{array}\]

 

(b) \[\begin{array}{cc}
\phantom{..}\ce{Br}\\
\phantom{}|\\
\phantom{}\ce{CH3 - C - CH3}\\
\phantom{}|\\
\phantom{....}\ce{C2H5}\phantom{}
\end{array}\]

 

(c) \[\begin{array}{cc}
\ce{CH3 - CH - CH2Br}\\
|\phantom{.....}\\
\ce{C2H5}\phantom{..}
\end{array}\]


निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया में अभिक्रिया दर के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

(a)
(b)
(c)

निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया में अभिक्रिया दर के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

(a)
(b)
(c)

उपरोक्त अभिक्रिया के लिए कौन-से कथन सही हैं?

(i) (a) और (e) दोनों नाभिकरागी हैं।

(ii) (c) में कार्बन परमाणु sp3 संकरित है।

(iii) (c) में कार्बन परमाणु sp2 संकरित है।

(iv) (a) और (e) दोनों इलेक्ट्रॉनरागी हैं।


निम्नलिखित कथनों में से कौन-से कथन उपरोक्त अभिक्रिया के लिए सही हैं?

(i) अभिक्रिया SN2 क्रियाविधि का अनुसरण करती है।

(ii) (b) और (d) का विन्यास एक दूसरे के विपरीत है।

(iii) (b) और (d) का विन्यास समान है।

(iv) अभिक्रिया SN1 क्रियाविधि का अनुसरण करती है।


C4H9Br अणुसूत्र के यौगिक ‘क’ को KOH के जलीय विलयन से अभिकृत किया गया। इस अभिक्रिया की दर केवल यौगिक 'क' की सांद्रता पर निर्भर करती है। जब इस यौगिक के दूसरे ध्रुवण घूर्णक समावयव ‘ख’ को KOH के जलीय विलयन से अभिकत किया गया तो अभिक्रिया दर यौगिक और KOH दोनों की सांद्रता पर निर्भय पाई गई।

  1. दोनों यौगिकों ‘क’ और ‘ख’ संरचना सूत्र लिखिए।
  2. इन दोनों यौगिकों में से कौन-सा प्रतीपित विन्यास के उत्पाद में परिवर्तित होगा।

ग्रीन्यार अभिकर्मक के उपयोग में लेशमात्र नमी भी न होना क्यों आवश्यक है?


ऐरिल हैलाइड नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति अत्यंत कम क्रियाशील होते हैं। निम्नलिखित यौगिकों की नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति अभिक्रियाशीलता का क्रम लिखिए और विवेचना कीजिए।

(I) (II) (III)

सायनाइड आयन उभदंती नाभिकरागी के समान क्रिया करता है। जलीय माध्यम में यह किस छोर से प्रबल नाभिकरागी का कार्य करता है? अपने उत्तर का कारण दीजिए।


कॉलम I में दी गई अभिक्रियाओं को कॉलम II में दिए गए अभिक्रिया के प्रकारों से सुमेलित कीजिए।

  कॉलम I कॉलम II
(i) (a) नाभिकरागी ऐरोमैटिक प्रतिस्थापन
(ii) \[\begin{array}{cc}
\ce{CH3 - CH = CH2 + HBr -> CH3 - CH - CH3}\\
\phantom{............................}|\phantom{}\\
\phantom{.............................}\ce{Br}\phantom{}
\end{array}\]
(b) इलेक्ट्रॉनरागी ऐरोमैटिक प्रतिस्थापन
(iii) (c) सेत्जेफ निराकरण
(iv) (d) इलेक्ट्रॉनरागी योगज
(v) \[\begin{array}{cc}
\ce{CH3  CH2 CH CH3 ->[{ऐल्कोहॉली KOH}] CH3  CH = CH CH3}\\
\phantom{}|\phantom{..........................}\\
\phantom{}\ce{Br}\phantom{.........................}
\end{array}\]
(e) नाभिकरागी प्रतिस्थापन (SN1)

अभिकथन - tert-ब्यूटिल ब्रोमाइड वुर्ट्ज अभिक्रिया द्वारा 2, 2, 3, 3-टेट्रामेथिलब्यूटेन देता है।

तर्क - वुर्टज अभिक्रिया में ऐल्किल हैलाइड शुष्क ईथर में सोडियम से अभिक्रिया करते हैं और हैलाइड में उपस्थित कार्बन परमाणुओं की संख्या से दुगनी संख्या वाला हाइड्रोकार्बन बनाते हैं।


अभिकथन - मोनोहैलोएरीनों में अगला इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर होता है।

तर्क - हैलोजन परमाणु वलय को निष्क्रिय करता है।


क्षारों के साथ कुछ ऐल्किलहैलाइड प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ देते हैं जबकि कुछ निराकरण अभिक्रियाएँ। उदाहरणों की सहायता से ऐल्किल हैलाइडों के उन संरचनात्मक गुणों की विवेचना कीजिए जो इस अंतर का कारण हैं।


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