Advertisements
Advertisements
प्रश्न
तोयैरल्पैरपि ........... वारिदेन।
Advertisements
उत्तर १
English:
O Gardener! You have nurtured this tree of mercy with just a little water in the summer when the sun is shining. What in this world can be nurtured by clouds, which also pour water from all sides during the rainy season, like flowing rivers? In other words, even an abundance of good things cannot make a person’s life worthy of a good life. This requires moments of joy and sorrow, for both joy and sorrow are the stories of human life, and both are essential.
उत्तर २
हिंदी:
हे माली। सूर्य के तेज चमकने (तपने) पर गर्मी के समय मेँ थोड़े जल से भी आपने दया के इस पेड की जो पुष्टि की है। जलोँ को वर्षा काल के चारोंओर से धाराओं के प्रवाहं को भी बरसाते हुए बादल से इस संसार मे उसपेड की पुष्टि क्या की जा सकती है? अर्थात् उत्तम जीवन जीने के लिए सुखयुक्तवस्तुओं की अधिकता भी मानव जीवन को पूर्णतया सक्षम नहीं बनाती है। उसके लिएसुख अथा दुःख भरे क्षणो की आवश्यकता होती है, क्योकि सुख ओर दुःख दोनों मानवजीवन के ही कथे हैँ ओर दोनोँ ही आवश्यक हेँ।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
एकपदेन उत्तरं लिखत -
कस्य शोभा एकेन राजहंसेन भवति?
एकपदेन उत्तरं लिखत -
सरसः तीरे के वसन्ति?
एकपदेन उत्तरं लिखत -
के रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते?
सरसः शोभा केन भवति?
चातकः किमर्थं मानी कथ्यते?
कानि पूरयित्वा जलदः रिक्तः भवति?
अधोलिखितवाक्यम् रेखाङ्कितपदम् आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत -
जलदः नानानदीनदशतानि पूरयित्वा रिक्तोऽस्ति।
अधोलिखितवाक्यम् रेखाङ्कितपदम् आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत -
चातकः वने वसति।
सन्धिं/सन्धिविच्छेदं वा कुरुत -
....... + उपकारः = कृतोपकारः
सन्धिं/सन्धिविच्छेदं वा कुरुत -
मीनः + अयम् = ......
सन्धिं/सन्धिविच्छेदं वा कुरुत -
तोयैः + अल्पैः = ......
सन्धिं/सन्धिविच्छेदं वा कुरुत -
तरोः + अपि = .....
अधोलिखित विग्रहपदेन समस्तपदं रचयत -
| विग्रहपदानि | समस्त पदानि |
| राजा च असौ हंसः | ...... |
अधोलिखित विग्रहपदेन समस्तपदं रचयत -
| विग्रहपदानि | समस्त पदानि |
| भीमः च असौ भानुः | ...... |
अधोलिखित विग्रहपदेन समस्तपदं रचयत -
| विग्रहपदानि | समस्त पदानि |
| अम्बरम् एव पन्थाः | ...... |
अधोलिखित विग्रहपदेन समस्तपदं रचयत -
| विग्रहपदानि | समस्त पदानि |
| उत्तमा च इयम् श्रीः | ...... |
अधोलिखित विग्रहपदेन समस्तपदं रचयत -
| विग्रहपदानि | समस्त पदानि |
| सावधानं च तत् मनः, तेन | ....... |
