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प्रश्न
अधः सम्भाषणे केचन शब्दाः ‘क्त्वा’ ‘ल्यप्’ ‘तुमुन्’-प्रत्ययान्ताः सन्ति। तान् चित्वा समक्षं दत्ते रिक्तस्थाने लिखन्तु।
| सुधेशः | मनीषे! अहं पठित्वा वृक्षम् आरोहामि। | (पठित्वा) |
| मनीषा | सुधेश! वृक्षम् आरुह्य किं करोमि? | 1. (.....) |
| सुधेशः | अत्र आगत्य स्वयम् एव पश्य। | 2. (.....) |
| मनीषा | परम् अहं वृक्षम् आरोहुं न शक्नोमि। | 3. (.....) |
| सुधेशः | अस्तु! अहं पक्वानि आम्राणि पातयामि। | |
| तानि निरीक्ष्य गणयित्वा च करण्डके स्थापय। | 4. (.....) | |
| मनीषा | शीघ्रं कुरु वानराः आगच्छन्ति। तान् दृष्ट्वा अहं भीता। | 5. (.....) |
| सुधेशः | आम्राणि गृहीत्वा धावित्वा च गृहं गच्छ। | 6. (.....) |
| मनीषा | त्वम् अचिरात् कूर्दित्वा अवलम्ब्य अधः आगच्छ। | 7. (.....) |
| (उभौ उत्प्लुत्य गृहं धावतः) | (.....) |
व्याकरण/भाषा
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उत्तर
| सुधेशः | मनीषे! अहं पठित्वा वृक्षम् आरोहामि। | (पठित्वा) |
| मनीषा | सुधेश! वृक्षम् आरुह्य किं करोमि? | 1. (आरुह्य) |
| सुधेशः | अत्र आगत्य स्वयम् एव पश्य। | 2. (आगत्य) |
| मनीषा | परम् अहं वृक्षम् आरोहुं न शक्नोमि। | 3. (आरोहुम्) |
| सुधेशः | अस्तु! अहं पक्वानि आम्राणि पातयामि। | |
| तानि निरीक्ष्य गणयित्वा च करण्डके स्थापय। | 4. (निरीक्ष्य गणयित्वा) | |
| मनीषा | शीघ्रं कुरु वानराः आगच्छन्ति। तान् दृष्ट्वा अहं भीता। | 5. (दृष्ट्वा) |
| सुधेशः | आम्राणि गृहीत्वा धावित्वा च गृहं गच्छ। | 6. (गृहीत्वा धावित्वा) |
| मनीषा | त्वम् अचिरात् कूर्दित्वा अवलम्ब्य अधः आगच्छ। | 7. (कूर्दित्वा अवलम्ब्य) |
| (उभौ उत्प्लुत्य गृहं धावतः) | (उत्प्लुत्य) |
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