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प्रश्न
अब्बा ने क्या सोचकर कहानी की बात मान ली?
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उत्तर
उन्होंने सोचा कि बच्चों की बात कभी-कभी मान लेनी चाहिए। उन्हें जिज्ञासा भी थी कि देखें बच्चे कैसे क्या करते।
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वह एक दिन बहुत अनोखा था जब बच्चों को बड़ों के अधिकार मिल गए थे। वह दिन बीत जाने पर इन्होंने क्या सोचा होगा-
अम्मी ने
वह एक दिन बहुत अनोखा था जब बच्चों को बड़ों के अधिकार मिल गए थे। वह दिन बीत जाने पर इन्होंने क्या सोचा होगा-
दादी ने
अगर तुम्हें घर में एक दिन के लिए सारे अधिकार दे दिए जाएँ तो तुम क्या-क्या करोगी?
कहानी में ऐसे कई काम बताए गए हैं जो बड़े लोग आरिफ और सलीम से करने के लिए कहते थे। तुम्हारे विचार से उनमें से कौन-कौन से काम उन्हें बिना शिकायत किए कर लेने चाहिए थे और कौन-कौन से कामों के लिए मना कर देना चाहिए था?
"दोनों घंटों बैठकर इन पाबंदियों से बच निकलने की तरकीबें सोचा करते थे।"
तुम्हारे विचार से वे कौन कौन-सी तरकीबें सोचते होंगे?
"दोनों घंटों बैठकर इन पाबंदियों से बच निकलने की तरकीबें सोचा करते थे।"
कौन-सी तरकीब से उनकी इच्छा पूरी हो गई थी?
“… आज तो उनके सारे अधिकार छीने जा चुके हैं।”
अम्मी के अधिकार किसने छीन लिए थे?
तुम्हारे विचार से इस कहानी का नाम ‘एक दिन की बादशाहत’ क्यों रखा गया है? तुम भी अपने मन से सोचकर कहानी को कोई शीर्षक दो।
कहानी में उस दिन बच्चों को सारे बड़ों वाले काम करने पड़े थे। ऐसे में कौन एक दिन का असली ‘बादशाह’ बन गया था?
"रोज़ की तरह आज वह तर माल अपने लिए न रख सकती थी।"
कहानी में किन-किन चीज़ों को तर माल कहा गया है?
"रोज़ की तरह आज वह तर माल अपने लिए न रख सकती थी।"
कुछ ऐसी चीज़ों के नाम भी बताओ, जो तुम्हें ‘तर माल’ नहीं लगतीं।
"रोज़ की तरह आज वह तर माल अपने लिए न रख सकती थी।"
इन चीज़ों को तुम क्या नाम देना चाहोगी? सुझाओ।
कौन-कौन सी चीजें तुम्हें बिल्कुल बेकार लगती हैं?
खाने-पीने की चीजें
कौन-कौन सी चीजें तुम्हें बिल्कुल बेकार लगती हैं?
करने के काम
कौन-कौन सी चीजें तुम्हें बिल्कुल बेकार लगती हैं?
खेल
“इतनी भारी साड़ी क्यों पहनी?”
यहाँ पर ‘भारी साड़ी’ से क्या मतलब है?
