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प्रश्न
अब्बा ने क्या सोचकर कहानी की बात मान ली?
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उत्तर
उन्होंने सोचा कि बच्चों की बात कभी-कभी मान लेनी चाहिए। उन्हें जिज्ञासा भी थी कि देखें बच्चे कैसे क्या करते।
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वह एक दिन बहुत अनोखा था जब बच्चों को बड़ों के अधिकार मिल गए थे। वह दिन बीत जाने पर इन्होंने क्या सोचा होगा-
आरिफ ने
वह एक दिन बहुत अनोखा था जब बच्चों को बड़ों के अधिकार मिल गए थे। वह दिन बीत जाने पर इन्होंने क्या सोचा होगा-
अम्मी ने
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"दोनों घंटों बैठकर इन पाबंदियों से बच निकलने की तरकीबें सोचा करते थे।"
तुम्हारे विचार से वे कौन कौन-सी तरकीबें सोचते होंगे?
"दोनों घंटों बैठकर इन पाबंदियों से बच निकलने की तरकीबें सोचा करते थे।"
कौन-सी तरकीब से उनकी इच्छा पूरी हो गई थी?
क्या तुम उन दोनों को इस तरकीब से भी अच्छी तरकीब सुझा सकती हो?
“… आज तो उनके सारे अधिकार छीने जा चुके हैं।”
अम्मी के अधिकार किसने छीन लिए थे?
“… आज तो उनके सारे अधिकार छीने जा चुके हैं।”
क्या उन्हें अम्मी के अधिकार छीनने चाहिए थे?
“… आज तो उनके सारे अधिकार छीने जा चुके हैं।”
उन्होंने अम्मी के कौन-कौन से अधिकार छीने होंगे?
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"रोज़ की तरह आज वह तर माल अपने लिए न रख सकती थी।"
कहानी में किन-किन चीज़ों को तर माल कहा गया है?
"रोज़ की तरह आज वह तर माल अपने लिए न रख सकती थी।"
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तुम्हें भी अपना कोई खास कपड़ा सबसे अच्छा लगता होगा। उस कपड़े के बारे में बताओ। वह तुम्हें सबसे अच्छा क्यों लगता है?
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