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प्रश्न
अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?
विस्तार में उत्तर
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उत्तर
- मेरे द्वारा इस विकल्प का चयन करने का कारण यह है कि बिरजू महाराज गंडा बाँधने को एक औपचारिक परंपरा नहीं बनाना चाहते थे। जब वे नृत्य के प्रति शिष्य की लगन, निष्ठा और समर्पण को स्वयं जाँच परख लेते थे, तभी गंडा बाँधते थे। गंडा बाँधने की परंपरा को वे एक पवित्र और पावन परंपरा मानते थे, जिसका निर्वहन वे पूरी ईमानदारी के साथ करते थे।
- मेरे द्वारा इस विकल्प का चयन करने का कारण यह है कि बिरजू महाराज ने अपने जीवन में बचपन से लेकर बड़े होने तक अनेक उतार-चढ़ाव देखे थे। यद्यपि एक समय में उनका परिवार समृद्ध था किंतु पिता के देहांत के बाद उनकी आर्थिक परिस्थिति अच्छी नहीं रही। प्रतिकूल स्थितियों में भी उन्होंने अपने कला-कर्म का पूरी निष्ठा और लगन के साथ निर्वहन किया और नृत्य के प्रति अपने जुनून को कम नहीं होने दिया।
- मेरे द्वारा इस विकल्प का चयन करने का कारण यह है कि नृत्य कला भी एक बौद्धिक खेल है अतः बिरजू महाराज मानते थे कि नृत्य, गीत-संगीत आदि कलाएँ बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं और वे सभी को इसके लिए प्रेरित करते थे।
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