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आश्रम में किसी सहायक को रखते समय गांधी जी का क्या-क्या आग्रह रहता था? क्यों?

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प्रश्न

आश्रम में किसी सहायक को रखते समय गांधी जी का क्या-क्या आग्रह रहता था? क्यों?

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उत्तर

आश्रम में किसी सहायक को रखते समय गांधी जी इस बात का आग्रह करते थे कि हरिजन को रखा जाए। उनका कहना था कि ‘नौकरों को हमें वेतनभोगी मज़दूर नहीं, अपने भाई के समान समझना चाहिए। इससे कुछ कठिनाई हो सकती, कुछ चोरियाँ हो सकती हैं। फिर भी हमारी कोशिश सर्वथा निष्फल नहीं जाएगी।’

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गद्य (Prose) (Class 6)
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अध्याय 15: नौकर - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Vasant Part 1 Class 6
अध्याय 15 नौकर
अतिरिक्त प्रश्न | Q 14

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  • अगर मुझे इन चीज़ों को छूने भर से इतनी खुशी मिलती है, तो उनकी सुंदरता देखकर तो मेरा मन मुग्ध ही हो जाएगा। ऊपर रेखांकित संज्ञाएँ क्रमशः किसी भाव और किसी की विशेषता के बारे में बता रही हैं। ऐसी संज्ञाएँ भाववाचक कहलाती हैं। गुण और भाव के अलावा भाववाचक संज्ञाओं का संबंध किसी की दशा और किसी कार्य से भी होता है। भाववाचक संज्ञा की पहचान यह है कि इससे जुड़े शब्दों को हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं, देख या छू नहीं सकते। आगे लिखी भाववाचक संज्ञाओं को पढ़ो और समझो। इनमें से कुछ शब्द संज्ञा और क्रिया से बने हैं। उन्हें भी पहचानकर लिखो-

मिठास

भूख

शांति

भोलापन

बुढ़ापा

घबराहट

बहाव

फुर्ती

ताज़गी

क्रोध

मज़दूरी

अहसास

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तुमने कपड़ों को सिलते हुए देखा होगा। नीचे इस काम से जुड़े हुए कुछ शब्द दिए गए हैं। आसपास के बड़ों से या दरजी से इन शब्दों के बारे में पूछो और इन शब्दों को कुछ वाक्यों में समझाओ।

  • तुरपाई
  • बखिया
  • कच्ची सिलाई
  • चोर सिलाई

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