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प्रश्न
1 मीटर लंबी संकरी (और एक सिरे पर बंद) नली क्षैतिज रखी गई है। इसमें 76 cm लंबाई भरा पारद सूत्र, वायु के 15 cm स्तंभ को नली में रोककर रखता है। क्या होगा यदि खुला सिरा नीचे की ओर रखते हुए नली को ऊर्ध्वाधर कर दिया जाए?
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उत्तर
प्रारंभ में जब नली क्षैतिज है, तब बंद सिरे पर रोकी गई वायु का दाब वायुमंडलीय दाब के बराबर होगा क्योंकि यह वायु, वायुमंडलीय दाब के विरुद्ध पारे के स्तंभ को पीछे हटने से रोकती है।
∴ P1 = वायुमंडलीय दाब
= 76 cm पारद स्तंभ का दाब
यदि नली का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A cm² है तो वायु का आयतन V1 = 15 cm × A cm² = 15 A cm3। जब नली का खुला सिरा नीचे की ओर रखते हुए ऊर्ध्वाधर करते हैं तो खुले सिरे पर बाहर की ओर से वायुमंडलीय दाब (76 cm पारद स्तंभ का दाब) काम करता है जब कि ऊपर की ओर से 76 cm पारद सूत्र का दाब तथा बंद सिरे पर एकत्र वायु की दाब काम करते हैं। चूँकि खुले सिरे पर पारद स्तंभ + वायु का दाब अधिक है अतः पारद स्तंभ संतुलन में नहीं रह पाता और नीचे गिरते हुए, वायु को बाहर निकाल देता है।
माना पारद स्तंभ की h लंबाई नली से बाहर निकल जाती है।
तब, पारद स्तंभ की शेष ऊँचाई = (76 – h) cm
जबकि बंद सिरे पर वायु स्तंभ की लंबाई = (15 + 9 + h) cm
= (24 + h) cm
वायु का आयतन V2 = (24 + h) A cm3


माना अब इस वायु का दाब P2 है तो संतुलन की स्थिति में
P2 + (76 + h) cm पारद स्तंभ का दाब = वायुमंडलीय दाब
= 76 cm पारद स्तंभ का दाब
अतः P2 = h cm पारद स्तंभ का दाब
P1V1 = P2V2 से, ...[∵ ताप नियत रहता है।]
76 cm × 15 A cm3 = h cm × (24 × h) cm3
या 1140 = 24h + h2
या h2 + 24h - 1140 = 0
`"h" = [(-24 ± sqrt((24)^2 - 4 xx 1 xx (-1140)))/(2 xx 1)]` cm
`= ((-24 ± 71.67)/2)` cm
अतः h = 23.8 cm अथवा – 47.8 cm (जो अनुमान्य है।)
इसलिए h = 23.8 cm ≈ 24 cm ।
अतः लगभग 24 सेमी पारा बाहर निकल जायेगा। शेष पारे का 52 सेमी ऊँचा स्तंभ तथा 4.8 सेमी वायु स्तंभ इसमें जुड़कर बाह्य वायुमंडल के साथ संतुलन में रहते हैं। (यहाँ पूरे प्रयोग की अवधि में ताप को नियत माना गया है तब ही बॉयल के नियम का प्रयोग किया है।)
