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Chapters
▶ २: सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः
३: आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः
४: न खलु वयस्तेजसो हेतुः
५: एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी
६: मनःपूतं समाचरेत्
७: उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत
Chapter ८: अन्नाद् आनन्दं प्रति
Chapter ९: कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः
Chapter १०: णमो अरिहन्ताणम
Chapter ११: वर्णोच्चारण-शिक्षा २

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Solutions for Chapter २: सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः
Below listed, you can find solutions for Chapter २ of CBSE NCERT for संस्कृत शारदा इयत्ता ९.
NCERT solutions for संस्कृत शारदा इयत्ता ९ २ सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः Intext Questions [Page 13]
सर्वं शब्देन भासते
| शब्द: | अर्थ: | हिन्दी | English | मातृभाषया अर्थं लिखत |
| अपव्ययः (पुं.प्र.ए.व.) | व्यर्थव्ययः | अनुचित व्यय | Unnecessary expense | |
| अवाप्मतु् (अव + √अप् + तुमुन्, अव्ययम्) | प्राप्तुम् | प्राप्त करने के लिए | To get | |
| अविच्छिन्नः (नञ् तत्पुरुषः, पुं.प्र.ए.व.) | न विच्छिन्नः | अटूट | Inseparable | |
| अर्जितस्य (√अर्ज् + क्त, पुं.ष.ए.व.) | उपार्जितस् | कमाए हुए का | Of the earned | |
| अर्थोपार्जनम् (ष.तत्पुरुषः, नपुं.प्र.ए.व.) | अर्थस्य उपार्जनम् | धन कमाना | Earning | |
| आजीविका (स्त्री.प्र.ए.व.) | वृत्तिः | व्यवसाय | Livelihood | |
| आडम्बरपर्णः (पुं.प्र.ए.व.) | पाखण्डयुक्तः | दिखावे से भरा | Ostentatious | |
| आर्थिकव्यवहारः (पुं .प्र.ए.व.) | धनविषयकः व्यवहारः | आर्थिक लेन-देन | Financial behavior | |
| आर्थिकसाक्षरता (कर्मधारयः स्त्री.प्र.ए.व.) | आर्थिकी साक्षरता | वित्तीय साक्षरता | Financial literacy | |
| आवृत्तिनिक्षेपः (पुं.प्र.ए.व.) | आवृत्तिनिक्षेपः | आवर्ती जमा | Recurring Deposit (RD) | |
| उचितनिवेशम् (पुं.द्वि.ए.व.) | साधुनिवेशम | योग्य निवेश | Proper investment | |
| उद्त्यधृ (उद् + √धृ + ल्यप्) | उद्धारं कृत्वा | ऊपर उठाकर | By lifting up | |
| औचित्यपर्णः (पुं.प्र.ए.व.) | समुचितः | उपयुक्त | Justified | |
| कष्टार्जितधनस् (कर्मधारयः, नप.ष.ए.व.) | कष्टेन अर्जितम् कष्टार्जितम् कष्टार्जितं धनं, तस्य | कष्ट से कमाए हुए धन का | Of the wealth earned with difficulty | |
| कालान्तरेण (नपुं .तृ .ए.व.) | अन्यः कालः, तेन | समय बीतने पर | By the course of time | |
| किसान-विकास-पत्रम् (नपुं.प्र.ए.व.) | कृषकस्य विकासः किसानविकासः, तदर्थं पत्रम् | किसान विकास पत | Kisan Vikas Patra (KVP) | |
| चक्रवृद्ध्यंशेन(तृ.तत्पुरुषः, पुं.तृ.ए.व.) | चक्रवृद्ध्या अंशेन | चक्रवृद्धि ब्याज से | By Compound Interest | |
| तुच्छकारणैः (कर्मधारयः, नपुं.तृ.ब.व.) | तुच्छं कारणम, तैः | निरर्थक कारणों से | For trivial reasons | |
| त्वरिताहारः (कर्मधारयः पुं.प्र.ए.व.) | त्वरितः चासौ आहारः | शीघ्र आहार | Fast Food | |
| नियतनिक्षेपः (मध्यपद-लोपी कर्मधारयः पुं.प्र.ए.व.) | नियतकालिकः निक्षेपः | निश्चित अवधि के लिए जमा | Fixed Deposit (FD) | |
| न्यायपूर्णम् (तृतीया-तत्पुरुषः, नपुं.प्र.ए.व.) | न्यायेन पूर्णम् | न्यायसङ्गत | Justified | |
| पुटीकृतभोजनम् (कर्मधारयः, नपुं.प्र.ए.व.) | पुटीकृतं भोजनम् | डिब्बाबन्द खाना | Packaged food | |
| पूर्तये (स्त्री.च.ए.व.) | सम्पूर्तिनिमित्तम् | उपलब्ध कराने के लिए | To fulfill | |
| प्रदर्शनकारिपरिधानम् (कर्मधारयः, नपुं.प्र.ए.व.) | प्रदर्शनकारि परिधानम् | प्रदर्शनकारी वेशभषा | Fashionable attire | |
| प्रभूतः (पुं.प्र.ए.व.) | प्रचुरम् | पर्याप्त | Abundant | |
| प्रधानमन्त्री-जन धन योजना (स्त्री.प्र.ए.व.) | प्रधानमन्त्री-जन धन योजना | प्रधानमन्त्री जन धन योजना | Pradhan Mantri Jana Dhana Yojna | |
| बाधितानि (नपुं.प्र.ब.व.) | अवरोधितानि | बाधित होते हैं | Interrupted | |
| मा (अ) गृधः (पुं.प्र.ए.व.) | लोभ न कुरु | लालच न करो | Don’t covet | |
| मूलभूतानाम (नपुं.ष.ब.व.) | मूले भूतम्, तेषाम् | मौलिक | Basic | |
| यथार्थतत्त्वम् (नपुं.प्र.ए.व.) | यथार्थं तत्त्वम् | वास्तविक तत्त्व | True essence | |
| राष्ट्रिय-पेंशन-योजना (स्त्री.प्र.ए.व.) | राष्ट्रिय-पेंशन- योजना | राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली | National Pension System (NPS) | |
| राष्ट्रिय-संचय-प्रमाणपत्रम् (नपुं.प्र.ए.व.) | राष्ट्रिय-संचय-प्रमाणपत्रम् | राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत | National Savings Certificate (NSC) | |
| वरिष्ठ-नागरिक-संचय-योजना (स्त्री.प्र.ए.व.) | वरिष्ठ-नागरिक-संचय-योजना | वरिष्ठ नागरिक बचत योजना | Senior Citizens’ Savings Scheme (SCSS) | |
| विलासव्यसनाय (नपुं.च.ए.व.) | विलासश्च व्यसनञ्च, तस्मै | सुख भोग के लिए | For luxury and enjoyment | |
| विपन्ना (स्त्री.प्र.ए.व.) | सम्पन्नतारहिता | संकटग्रस्त | Destitute | |
| शीतपेयम् (कर्मधारय, नपुं.प्र.ए.व.) | शीतं पेयम् | मृदु पेय | Soft Drinks | |
| शुचिः (पुं.प्र.ए.व.) | पवित्रः | शुद्ध | Clean | |
| सचेतनता (स्त्री.प्र.ए.व.) | विवेकः | जागरुकता | Consciousness | |
| सञ्चयः (पुं.प्र.ए.व.) |
सङ्ग्रहः | संचय | Accumulation | |
| सन्तोलनम् (नपुं.प्र.ए.व.) |
समन्वयः | सन्तुलित करना | Balance | |
| सुकन्या-समृद्धि- योजना (स्त्री.प्र.ए.व.) |
सुकन्या-समृद्धि-योजना | सुकन्या समृद्धि योजना | Sukanya Samriddhi Yojna |
|
| सूत्ररूपम् (नपुं.प्र.ए.व.) |
संक्षेपरूपम् | संक्षिप्त रूप | Aphoristic form | |
| स्वावलम्बी (पुं.प्र.ए.व.) |
आत्मनिर्भरः | स्वावलम्बी | Self-reliant |
NCERT solutions for संस्कृत शारदा इयत्ता ९ २ सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः अभ्यासाद् जायते सिद्धिः [Pages 18 - 20]
एकपदेन उत्तरं लिखत -
वास्तविकसुखस्य आधारः कः?
एकपदेन उत्तरं लिखत -
कस्य अभावात् स्वकर्तव्यपालनं कठिनं भवति?
एकपदेन उत्तरं लिखत -
स्वस्थः आर्थिकव्यवहारः कतिविधः भवति?
एकपदेन उत्तरं लिखत -
कीदृशः आर्थिकव्यवहारः कदापि न करणीयः?
एकपदेन उत्तरं लिखत -
स्वावलम्बनं कस्य मूलं वर्तते?
एकपदेन उत्तरं लिखत -
जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः किं पूर्यते?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत -
“सुखस्य मूलं धर्मः, धर्मस्य मूलम् अर्थः” इतीदं प्रसिद्धं वाक्यं कस्मिन् ग्रन्थे प्राप्यते?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत -
सामान्यजीवने कासाम् आवश्यकतानां पूर्त्यर्थं धनम् आवश्यकम्?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत -
ब्राह्मे मुहूर्ते कयोः चिन्तनम् आवश्यकम्?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत -
जनः केन स्वावलम्बी भवति?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत -
लघुलघुसञ्चयः अपि कालान्तरे केन रूपेण वर्धते?
वाक्येन सह ग्रन्थस्य सम्मेलनं कुरुत -
| (क) जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः। | १. गरुडपुराणम् |
| (ख) ब्राह्मे मुहूर्ते चोत्थाय धर्ममर्थं च चिन्तयेत्। | २. मनुस्मृतिः |
| (ग) सर्वेषामेव शौचानामर्थशौचं परं स्मृतम्। | ३. अर्थशास्त्रम् |
| (घ) सुखस्य मूलं धर्मः, धर्मस्य मूलम् अर्थः। | ४. चाणक्यनीतिः |
रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत -
सुखस्य मूलं धर्मः।
रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत -
दिनस्य आरम्भे धर्मार्थयोः चिन्तनम् आवश्यकम् ।
रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत -
सन्मार्गेण एव धनार्जनं करणीयम् ।
रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत -
अनैतिकः आर्थिकव्यवहारः कदापि न करणीयः।
रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत -
संकटकाले स्वाभिमानिनः अन्यजनस्य आर्थिकसहायतां नापेक्षते।
उचिते: पदे: रिक्तस्थानानि पूरयत -
| विद् | विद्धते | विद्येते | विद्धन्ते |
| लभ् | ............ | लभेते | लभन्ते |
| अपेक्ष् | अपेक्षते | ............ | अपेक्षन्ते |
| वर्ध् | ............ | वर्धेते | ........... |
| सेव् | ............ | ............ | सेवन्ते |
| मोद् | मोदते | ............ | ........... |
“सुखस्य मूलं धर्मः, धर्मस्य मूलम् अर्थः” इत्यस्य मुख्य आशयः
कः अस्ति ?
सुखस्य आधारः केवलम् अर्थः एव।
धर्मस्य आधारः केवलं सुखम् एव।
धर्मस्य आधारः अर्थः, सुखस्य आधारः धर्मः।
सुखं, धर्मः, अर्थः – एतेषां मध्ये सम्बन्धः नास्ति।
गरुडपुराणे किम् उपदिष्टम् अस्ति?
रात्रौ धनस्य चिन्तनं करणीयम्।
प्रभाते धर्मार्थयोः चिन्तनं करणीयम्।
केवलं धर्मचिन्तनं करणीयम्।
केवलम् अर्थचिन्तनं करणीयम्।
“सर्वेषामेव शौचानामर्थशौचं परं स्मृतम्” इत्यस्य तात्पर्यं किम्?
जलशौचमेव श्रेष्ठम्।
मृद्वारिशौचमेव श्रेष्ठम्।
अर्थशौचं सर्वापरि, अन्यविधशौचेभ्यः श्रेयः।
शौचस्य आवश्यकता नास्ति।
छात्रैः क्रियमाणः अपव्ययः कः?
स्वास्थ्यलाभाय व्ययः।
विद्यार्जनाय व्ययः।
आडम्बरयुक्तः प्रदर्शनात्मकः व्ययः।
आत्मसुरक्षायै व्ययः।
“जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः” इति वाक्यं कः अवदत्?
बृहस्पतिः
चाणक्यः
मनुः
याज्ञवल्क्यः
Solutions for २: सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः

NCERT solutions for संस्कृत शारदा इयत्ता ९ chapter २ - सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः
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